Delhi: दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। शिक्षा निदेशालय (DoE) ने आदेश दिया है कि अब स्कूल फीस केवल महीने के आधार पर ही लेंगे। स्कूलों ने अब माता-पिता पर एक साथ
Delhi: दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। शिक्षा निदेशालय (DoE) ने आदेश दिया है कि अब स्कूल फीस केवल महीने के आधार पर ही लेंगे। स्कूलों ने अब माता-पिता पर एक साथ कई महीनों की फीस या एडवांस पेमेंट के लिए दबाव नहीं डाल सकते। यह फैसला खासतौर पर कम और मध्यम आय वाले परिवारों की आर्थिक मदद के लिए लिया गया है।
क्या हैं नए नियम और फीस देने का तरीका?
शिक्षा निदेशालय के 30 अप्रैल 2026 के आदेश के मुताबिक, कोई भी प्राइवेट स्कूल एक कैलेंडर महीने से ज्यादा की फीस एक साथ मांगने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। एडमिशन लेने या बच्चे का नाम स्कूल में रखने के लिए एडवांस फीस की शर्त रखना अब मना है। हालांकि, अगर कोई अभिभावक अपनी मर्जी से एक से ज्यादा महीने की फीस एक साथ जमा करना चाहता है, तो उसे इसकी अनुमति होगी।
नियम न मानने वाले स्कूलों पर क्या होगी कार्रवाई?
DoE ने सभी प्राइवेट स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे इस आदेश को अपने नोटिस बोर्ड पर लगाएं और स्कूल की वेबसाइट पर भी अपलोड करें। इसके लिए 7 वर्किंग दिनों का समय दिया गया है। अगर कोई स्कूल इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम 1973 के तहत सख्त कार्रवाई होगी। इसमें स्कूल की मान्यता रद्द करना या मैनेजमेंट को सरकारी नियंत्रण में लेना शामिल हो सकता है।
इस फैसले का असर और बैकग्राउंड
यह आदेश दिल्ली हाई कोर्ट के 2013 के एक फैसले और 2019 के पुराने सर्कुलर के बाद आया है। कई माता-पिता ने शिकायत की थी कि स्कूल उनसे तिमाही (quarterly) या छमाही आधार पर फीस मांगते हैं, जिससे उन पर बोझ बढ़ता है। इंडियन स्कूल की प्रिंसिपल तानिया जोशी और माउंट आबू पब्लिक स्कूल की ज्योति अरोरा जैसे अधिकारियों ने इस कदम का समर्थन किया है और कहा है कि स्कूल फीस के मामले में लचीला रुख अपनाएंगे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या स्कूल अब भी एडवांस फीस ले सकते हैं?
स्कूल अब माता-पिता को एडवांस फीस देने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। लेकिन अगर पेरेंट्स खुद अपनी इच्छा से एक से ज्यादा महीने की फीस जमा करना चाहते हैं, तो वे ऐसा कर सकते हैं।
नियमों का पालन न करने पर स्कूल को क्या सजा मिलेगी?
नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम 1973 के तहत कार्रवाई होगी, जिसमें स्कूल की मान्यता वापस लेना या मैनेजमेंट को टेकओवर करना शामिल है।