Delhi के प्राइवेट स्कूलों में फीस बढ़ोतरी पर लगाम, 15 जुलाई तक बनानी होगी फीस कमेटी, अभिभावकों की मंजूरी होगी जरूरी
Delhi: दिल्ली सरकार ने निजी स्कूलों में मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने की आदत को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब सभी प्राइवेट स्कूलों को 15 जुलाई, 2026 तक ‘स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी’ (SLFRC) का गठन करना होगा
Delhi: दिल्ली सरकार ने निजी स्कूलों में मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने की आदत को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब सभी प्राइवेट स्कूलों को 15 जुलाई, 2026 तक ‘स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी’ (SLFRC) का गठन करना होगा। यह कमेटी अगले तीन सालों यानी 2026-27 से 2028-29 तक के लिए फीस तय करेगी, जिससे अभिभावकों को बार-बार होने वाली फीस बढ़ोतरी से राहत मिलेगी।
नए नियमों के मुताबिक, अब स्कूल अपनी मर्जी से फीस नहीं बढ़ा पाएंगे। फीस बढ़ाने के लिए अभिभावकों की मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षा निदेशालय (DoE) ने इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। स्कूलों को पहले पेरेंट-टीचर एसोसिएशन (PTA) बनाना होगा, जिसके बाद खुली लॉटरी के जरिए पांच अभिभावकों और तीन शिक्षकों का चुनाव किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होगी और शिक्षा विभाग का एक अधिकारी इसकी निगरानी करेगा।
फीस निर्धारण की प्रक्रिया और समय सीमा को लेकर सरकार ने स्पष्ट गाइडलाइंस जारी की हैं:
| विवरण | तारीख/नियम |
|---|---|
| कमेटी गठन की आखिरी तारीख | 15 जुलाई, 2026 |
| फीस निर्धारण की अवधि | 3 शैक्षणिक सत्र (2026-27 से 2028-29) |
| दस्तावेज जमा करने की तारीख | 31 जुलाई, 2026 (CA द्वारा प्रमाणित ऑडिट रिपोर्ट के साथ) |
| फीस पर फैसले का समय | प्रस्ताव मिलने के 30 दिनों के भीतर |
| अग्रिम फीस की सीमा | एक महीने से ज्यादा की एडवांस फीस नहीं ले सकेंगे स्कूल |
दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार, जब तक नई फीस को मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक स्कूल केवल 2025-26 सत्र के बराबर ही फीस वसूल सकते हैं। अगर कोई स्कूल नियमों को तोड़कर ज्यादा पैसे वसूलता है, तो वह राशि अभिभावकों को वापस करनी होगी या अगली फीस में एडजस्ट करनी होगी। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि इस व्यवस्था का मकसद फीस निर्धारण में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है।
नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों पर सरकार सख्त कार्रवाई करेगी। पहले उल्लंघन पर 1 लाख से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में स्कूल की मान्यता रद्द करने या स्कूल प्रबंधन को सरकार द्वारा अधिग्रहित करने जैसे कड़े कदम भी उठाए जा सकते हैं। शिक्षा निदेशक वेदिता रेड्डी ने इस संबंध में आधिकारिक परिपत्र जारी कर दिया है।