Delhi: राजधानी दिल्ली की जेलों में भीड़ इतनी बढ़ गई है कि अब वहां रहना मुश्किल हो गया है। NCRB के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली की जेलें 194.6% ऑक्यूपेंसी रेट के साथ देश की सबसे ज्यादा भीड़ वाली जेलें बन गई हैं। स्थ
Delhi: राजधानी दिल्ली की जेलों में भीड़ इतनी बढ़ गई है कि अब वहां रहना मुश्किल हो गया है। NCRB के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली की जेलें 194.6% ऑक्यूपेंसी रेट के साथ देश की सबसे ज्यादा भीड़ वाली जेलें बन गई हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि सरकार अब तिहाड़ और नरेला में नए जेल कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना बना रही है।
जेलों में भीड़ और स्टाफ की कमी का क्या है हाल
दिल्ली की जेलों में कैदियों की संख्या उनकी क्षमता से कहीं ज्यादा है। साल 2023 में सेंट्रल जेल नंबर 4 में भीड़ 550% तक पहुंच गई थी। इसके साथ ही जेलों में स्टाफ की भी भारी कमी है। कुल स्टाफ में 27% की कमी है, जिसमें करेक्शनल स्टाफ की 60% और अफसरों की 34% पोस्ट खाली पड़ी हैं। नियमों के मुताबिक एक गार्ड पर 6 कैदी होने चाहिए, लेकिन असलियत इससे बहुत अलग है।
मेडिकल सुविधाओं और मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति
जेलों में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। मॉडल प्रिजन मैनुअल के हिसाब से 300 कैदियों पर एक डॉक्टर होना चाहिए, लेकिन दिल्ली में करीब 18,000 कैदियों के लिए सिर्फ 90 डॉक्टर हैं। यानी एक डॉक्टर पर 206 कैदियों का बोझ है। वहीं इंडिया जस्टिस रिपोर्ट के मुताबिक, 500 कैदियों पर एक मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक का जो मानक है, उसे दिल्ली समेत कोई भी राज्य पूरा नहीं कर पाया है।
अंडरट्रायल कैदियों की संख्या और अदालती कार्यवाही
जेलों में भीड़ बढ़ने की सबसे बड़ी वजह अंडरट्रायल कैदी हैं। इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2025 के अनुसार, दिल्ली की जेलों में 91% कैदी ऐसे हैं जिनका ट्रायल अभी चल रहा है। दिल्ली की जिला अदालतों में 14 लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं, जिनमें से हर पांच में से एक मामला पांच साल से ज्यादा पुराना है। हालांकि, अंडरट्रायल रिव्यू कमेटी की मदद से जून 2025 तक 5,197 कैदियों को रिहा किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशंस (OCIs) को बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, क्योंकि दिल्ली में इनका इस्तेमाल सिर्फ 3% ही हो रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली की जेलों में ऑक्यूपेंसी रेट कितना है?
NCRB के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, 7 मई 2026 तक दिल्ली की जेलों में ऑक्यूपेंसी रेट 194.6% है, जो इसे भारत की सबसे अधिक भीड़ वाली जेल बनाता है।
जेलों में अंडरट्रायल कैदियों की स्थिति क्या है?
इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2025 के मुताबिक, दिल्ली की जेलों में कुल कैदियों में से 91% अंडरट्रायल हैं, यानी ऐसे लोग जिनका फैसला अभी अदालत से नहीं आया है।