Delhi की बिजली कंपनियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत, 38,500 करोड़ रुपये के CAG ऑडिट पर लगी रोक

Delhi: दिल्ली की तीन प्राइवेट बिजली वितरण कंपनियों (discoms) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार द्वारा कराए जाने वाले CAG ऑडिट पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह पूरा मामला करीब 38,500 करोड़ रुपये के र

Delhi: दिल्ली की तीन प्राइवेट बिजली वितरण कंपनियों (discoms) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार द्वारा कराए जाने वाले CAG ऑडिट पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह पूरा मामला करीब 38,500 करोड़ रुपये के रेगुलेटरी एसेट्स (RAs) से जुड़ा है, जिसे उपभोक्ताओं से वसूला जाना था।

शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने यह अंतरिम आदेश जारी किया। कोर्ट ने साफ किया कि जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक यथास्थिति (status quo) बनाए रखी जाएगी। इसका मतलब है कि न तो दिल्ली सरकार का CAG ऑडिट होगा और न ही APTEL द्वारा नियुक्त किसी स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट से ऑडिट कराया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि DERC द्वारा CAG को ऑडिट सौंपने के फैसले की कानूनी वैधता की जांच जरूरी है।

इस मामले में कोर्ट ने बिजली रेगुलेटर के उस प्लान पर भी रोक लगा दी है, जिसके तहत 38,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम उपभोक्ताओं से वसूली जानी थी। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उपभोक्ताओं से वसूली से पहले ऑडिट जरूरी है, जबकि बिजली कंपनियों की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि ऑडिट और वसूली दो अलग मुद्दे हैं। दिल्ली सरकार की तरफ से ASG एस.वी. राजू ने कहा कि कंपनियों को सब्सिडी के रूप में सरकारी पैसा मिलता है, इसलिए जनहित में CAG ऑडिट होना चाहिए।

मुख्य बिंदु विवरण
कुल विवादित राशि लगभग 38,500 करोड़ रुपये
कोर्ट का फैसला CAG ऑडिट पर अंतरिम रोक
अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026
प्रभावित कंपनियां BSES Rajdhani, BSES Yamuna और Tata Power DDL
रोक का दायरा CAG ऑडिट और उपभोक्ताओं से वसूली दोनों पर रोक

दिल्ली के बिजली मंत्री आशीष सूद ने इस फैसले पर कहा कि यह केवल एक प्रक्रियात्मक आदेश है और इसे कंपनियों को मिली क्लीन चिट या अंतिम फैसला न माना जाए। वहीं, Tata Power-DDL ने उम्मीद जताई है कि अगली सुनवाई में पारदर्शिता और जवाबदेही के हित में सकारात्मक परिणाम निकलेंगे।