Delhi: राजधानी दिल्ली में गर्मी ने मार्च-अप्रैल में ही अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। सोमवार, 27 अप्रैल 2026 को दोपहर 3:30 बजे बिजली की मांग 7,078 MW तक पहुंच गई, जो अप्रैल के महीने में पहली बार 7,000 MW के आंकड़
Delhi: राजधानी दिल्ली में गर्मी ने मार्च-अप्रैल में ही अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। सोमवार, 27 अप्रैल 2026 को दोपहर 3:30 बजे बिजली की मांग 7,078 MW तक पहुंच गई, जो अप्रैल के महीने में पहली बार 7,000 MW के आंकड़े को पार कर गई है। शहर में पारा 42.3 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा है, जिसकी वजह से लोग AC और कूलर का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।
बिजली की मांग में इतनी बढ़ोतरी क्यों हुई?
Delhi State Load Dispatch Centre (SLDC) के आंकड़ों के मुताबिक, भीषण हीटवेव की वजह से बिजली की खपत अचानक बढ़ी है। इससे पहले 25 अप्रैल को तापमान 42.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो 2022 के बाद अप्रैल का सबसे अधिक तापमान था। पिछले साल 2024 और 2025 में बिजली की मांग जून के महीने में 7,000 MW को पार करती थी, लेकिन इस बार यह अप्रैल में ही हो गया।
डिस्कॉम्स ने कैसे संभाला लोड और क्या है तैयारी?
BSES के अधिकारियों ने बताया कि उनके BRPL और BYPL डिस्कॉम ने सोमवार को क्रमशः 3,159 MW और 1,446 MW की मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया। वहीं Tata Power (TPDDL) ने उत्तर दिल्ली में 2,030 MW की डिमांड पूरी की, जो इस सीजन का सबसे उच्चतम स्तर है। TPDDL ने आने वाले समय के लिए 2,900 MW तक की व्यवस्था की है क्योंकि उन्हें लोड 2,622 MW तक जाने की उम्मीद है।
देशभर में बिजली की स्थिति और भविष्य का अनुमान
सिर्फ दिल्ली ही नहीं, पूरे भारत में भी बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर है। 25 अप्रैल को राष्ट्रीय स्तर पर पीक डिमांड 256 GW तक पहुंच गई थी। पावर मिनिस्ट्री का अनुमान है कि इस गर्मी के मौसम में पूरे देश की पीक डिमांड 270 GW से 271 GW तक जा सकती है। IMD ने चेतावनी दी है कि उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्सों में हीटवेव का असर बना रहेगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली में बिजली की सबसे ज्यादा मांग कब और कितनी रही?
सोमवार, 27 अप्रैल 2026 को दोपहर 3:30 बजे दिल्ली में बिजली की पीक डिमांड 7,078 MW दर्ज की गई।
इस गर्मी में दिल्ली की बिजली डिमांड का अनुमान क्या है?
अधिकारियों का अनुमान है कि इस गर्मी के मौसम में दिल्ली की पीक पावर डिमांड 9,000 MW के पार जा सकती है।