Delhi: दिल्ली सरकार ने दावा किया था कि साल 2025 शहर के लिए सबसे साफ साल रहा, लेकिन अब RTI से मिले आंकड़ों ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार का कहना था कि पिछले आठ सालों में हवा की गुणवत्ता सबसे बेहतर हुई है, जबक
Delhi: दिल्ली सरकार ने दावा किया था कि साल 2025 शहर के लिए सबसे साफ साल रहा, लेकिन अब RTI से मिले आंकड़ों ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार का कहना था कि पिछले आठ सालों में हवा की गुणवत्ता सबसे बेहतर हुई है, जबकि डेटा कुछ और ही कहानी बता रहा है। आम जनता के लिए यह खबर इसलिए जरूरी है क्योंकि इसका सीधा असर उनकी सेहत और सांसों पर पड़ता है।
सरकार ने क्या दावे किए और RTI में क्या निकला?
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने 1 जनवरी 2026 को बताया था कि 2025 में करीब 200 दिन AQI 200 से नीचे रहा और पिछले चार सालों के मुकाबले 15% सुधार हुआ। सरकार ने इसका श्रेय धूल नियंत्रण, मशीनीकृत सफाई और गाड़ियों के प्रदूषण पर सख्ती को दिया। लेकिन DPCC से मिले RTI डेटा के मुताबिक, 2020, 2023 और 2024 जैसे सालों में भी AQI 200 से नीचे रहने वाले दिनों की संख्या इससे ज्यादा थी।
प्रदूषण के स्तर में कितना सुधार हुआ?
सरकारी दावों और असल आंकड़ों के बीच काफी अंतर देखने को मिला है। जहाँ सरकार ने PM2.5 के स्तर को 96 तक गिरने की बात कही थी, वहीं RTI डेटा में यह 104 दर्ज किया गया, जो सुरक्षित सीमा से बहुत ऊपर है। इसी तरह PM10 का स्तर 213 रहा, जिसमें बहुत मामूली सुधार देखा गया।
| पैरामीटर |
सरकारी दावा |
RTI डेटा (असलियत) |
| PM2.5 स्तर |
96 |
104 |
| PM10 स्तर |
सुधार का दावा |
213 |
| AQI < 200 दिन |
8 साल में सबसे बेहतर |
2020, 2023, 2024 में ज्यादा दिन थे |
पराली जलाने और अन्य संस्थाओं का क्या कहना है?
नासा वैज्ञानिक हिरण जेठवा ने नवंबर 2025 में बताया कि पराली जलाने की घटनाओं में कमी नहीं आई है। उनके अनुसार 2025 में 2020 के मुकाबले 25% और 2024 के मुकाबले 33% ज्यादा आग लगी थी। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण रोकने के लिए CAQM जैसी संस्थाएं काम कर रही हैं, जिसने 95 निर्देश जारी किए हैं और GRAP प्लान लागू किया है। CPCB के नियमों के मुताबिक 0-50 AQI को अच्छा और 401-500 को गंभीर श्रेणी में रखा जाता है।