Delhi: दिल्ली सरकार शहर की हवा को साफ करने के लिए अब देसी तकनीक का सहारा ले रही है। प्रदूषण से निपटने के लिए शहर के अलग-अलग हिस्सों में ‘मेड इन इंडिया’ डिवाइस लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने खुद इन मश
Delhi: दिल्ली सरकार शहर की हवा को साफ करने के लिए अब देसी तकनीक का सहारा ले रही है। प्रदूषण से निपटने के लिए शहर के अलग-अलग हिस्सों में ‘मेड इन इंडिया’ डिवाइस लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने खुद इन मशीनों का जायजा लिया और बताया कि सरकार साल भर प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई लड़ेगी, न कि सिर्फ सर्दियों में।
कौन-कौन सी नई मशीनें लगाई गई हैं?
प्रदूषण कम करने के लिए शहर में तीन खास तरह की तकनीकें आजमाई जा रही हैं। Rama Road के सतगुरु राम सिंह मार्ग पर बिजली के खंभों पर 21 STR-101 फिल्टर-फ्री एयर प्यूरीफायर लगाए गए हैं, जो एक घंटे में करीब 3 लाख लीटर हवा साफ कर सकते हैं। इसके अलावा, कीर्ति नगर-मायापुरी इलाके में पहली बार EV-माउंटेड एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल हो रहा है, जो पानी की बारीक बूंदों से धूल को जमीन पर बैठाती है। वहीं कीर्ति नगर फायर स्टेशन के पास PAWAN III डिवाइस लगाया गया है, जो गाड़ियों से निकलने वाले धुएं को सीधे सोखने का काम करता है।
AI और IIT कानपुर के साथ क्या समझौता हुआ है?
हवा की क्वालिटी को बेहतर तरीके से समझने के लिए दिल्ली सरकार ने IIT Kanpur के AIRAWAT Research Foundation के साथ हाथ मिलाया है। इसके तहत एक AI-आधारित सिस्टम बनाया जाएगा जो 48 से 72 घंटे पहले ही बता देगा कि प्रदूषण कब बढ़ सकता है और शहर के किन इलाकों में सबसे ज्यादा समस्या होगी। यह प्रोजेक्ट अगले पांच साल तक चलेगा। पर्यावरण मंत्री Manjinder Singh Sirsa ने बताया कि इन सभी तकनीकों की निगरानी National Physical Laboratory (NPL) और ICAT जैसी संस्थाएं करेंगी।
विशेषज्ञों ने क्या सलाह दी है?
हालांकि सरकार इन तकनीकों को लेकर उत्साहित है, लेकिन IIT Delhi के एक्सपर्ट Mukesh Khare ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि सिर्फ लैब टेस्ट के भरोसे नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीन पर यह देखना जरूरी है कि ये मशीनें कितनी असरदार हैं। उन्होंने जोर दिया कि प्रदूषण को रोकने के लिए उन जगहों पर काम करना होगा जहां से प्रदूषण पैदा हो रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
STR-101 एयर प्यूरीफायर क्या काम करता है?
यह एक सेल्फ-क्लीनिंग डिवाइस है जो बिजली के खंभों पर लगाया गया है। यह एक घंटे में लगभग 3,00,000 लीटर हवा को साफ कर धूल, धुएं और PM2.5 जैसे हानिकारक कणों को कम करता है।
AI सिस्टम से प्रदूषण नियंत्रण में कैसे मदद मिलेगी?
IIT कानपुर के साथ मिलकर बनाए जा रहे AI सिस्टम से हवा की क्वालिटी की सटीक भविष्यवाणी 48 से 72 घंटे पहले हो सकेगी, जिससे हॉटस्पॉट्स की पहचान करना आसान होगा।