Delhi: राजधानी दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर दिल्ली पुलिस ने एक जरूरी जानकारी साझा की है। पुलिस ने साफ किया है कि हर महिला को सुरक्षित महसूस करने और अपनी बात रखने का पूरा हक है। अगर कोई महिला उत्पीड़न, पीछा करने,
Delhi: राजधानी दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर दिल्ली पुलिस ने एक जरूरी जानकारी साझा की है। पुलिस ने साफ किया है कि हर महिला को सुरक्षित महसूस करने और अपनी बात रखने का पूरा हक है। अगर कोई महिला उत्पीड़न, पीछा करने, दुर्व्यवहार या हिंसा का सामना कर रही है, तो वह मदद के लिए पुलिस की विशेष यूनिट्स के पास जा सकती है।
मदद के लिए कहां जाएं और कौन सी यूनिट क्या काम करती है
दिल्ली पुलिस ने महिलाओं की सहायता के लिए दो मुख्य रास्तों के बारे में बताया है। पहला है Special Police Unit for Women and Children (SPUWAC), जो महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करती है। यह यूनिट दहेज और वैवाहिक विवादों जैसे मामलों की जांच करती है और काउंसलिंग व आत्मरक्षा की ट्रेनिंग भी देती है। दूसरा विकल्प Crime Against Women Cell (CAW Cell) है, जो 1983 से काम कर रहा है। इसका मुख्य काम घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न जैसे मामलों में आपसी सहमति से विवाद सुलझाना और मध्यस्थता करना है।
महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस का रुख और मौजूदा स्थिति
यह जानकारी ऐसे समय में आई है जब राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा पर चर्चा तेज है। National Crime Records Bureau की 2024 की रिपोर्ट में दिल्ली को महिलाओं के लिए असुरक्षित महानगरों में गिना गया था। हाल ही में 11 मई 2026 को एक प्राइवेट स्लीपर बस में गैंगरेप की घटना सामने आई थी, जिसमें ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार किया गया। इन घटनाओं के बाद दिल्ली पुलिस ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है और जागरूकता अभियानों के जरिए महिलाओं को सशक्त बनाने की कोशिश की है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
SPUWAC और CAW Cell में क्या अंतर है?
SPUWAC महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा, जांच और ट्रेनिंग पर केंद्रित है, जबकि CAW Cell मुख्य रूप से वैवाहिक विवादों और घरेलू हिंसा के मामलों में सुलह और मध्यस्थता का काम करता है।
क्या CAW Cell कोर्ट की तरह समन जारी कर सकता है?
नहीं, CAW Cell के पास जबरन बुलाने या समन जारी करने की शक्ति नहीं होती है। यह यूनिट मुख्य रूप से बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने का प्रयास करती है, कानूनी आदेश जारी करने का अधिकार केवल न्यायपालिका के पास होता है।