Delhi में जंतर मंतर प्रदर्शनकारियों को खाना पहुँचाने वालों की तलाश, पुलिस ने फूड रैपर्स से खोजे आउटलेट्स

Delhi: जंतर मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच दिल्ली पुलिस ने एक अनोखा तरीका अपनाया है। पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर फेंके गए खाने के पैकेट और रैपर्स की मदद से उन रेस्टोरेंट और आउटलेट्स का पता लगाया है, जो यहाँ खाना भेज

Delhi: जंतर मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच दिल्ली पुलिस ने एक अनोखा तरीका अपनाया है। पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर फेंके गए खाने के पैकेट और रैपर्स की मदद से उन रेस्टोरेंट और आउटलेट्स का पता लगाया है, जो यहाँ खाना भेज रहे थे। यह कार्रवाई NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं के संदर्भ में की गई है।

जानकारी के मुताबिक, 20 जुलाई 2026 को प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई के बाद जंतर मंतर पर गुमनाम तरीके से खाने की डिलीवरी में काफी बढ़ोतरी हुई थी। इसके बाद पुलिस ने अलग-अलग कैफे और रेस्टोरेंट में जाकर उनके रिकॉर्ड की जांच की। कई दुकानदारों ने पुष्टि की है कि पुलिस अधिकारी उनके पास आए थे और डिलीवरी के ब्यौरे मांगे थे।

इसी बीच, 24 जुलाई 2026 को दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत एक एडवाइजरी जारी की। इसमें जोमैटो और स्विगी जैसे ऐप-आधारित फूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स सेवाओं को जंतर मंतर के आसपास अपने कामकाज को रेगुलेट करने को कहा गया। इसी दिन मध्य दिल्ली के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं बंद रहीं और 17 मेट्रो स्टेशन भी बंद कर दिए गए, जिससे ऑनलाइन डिलीवरी में काफी दिक्कत आई।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन पाबंदियों की वजह से उन्हें पानी की किल्लत का सामना करना पड़ा और अब वॉलंटियर्स को ही जरूरी सामान लाना पड़ रहा है। CJP प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया कि सरकार जंतर मंतर की घेराबंदी करने की कोशिश कर रही है।

दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों को गलत बताया है जिनमें कहा गया था कि पूरे न्यू दिल्ली इलाके में फूड डिलीवरी पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया है। पुलिस ने यह भी साफ किया कि निजामुद्दीन थाने में खाना पहुँचाने वाले तीन लड़कों को हिरासत में लेने की खबरें झूठी हैं और उन्हें सिर्फ रूटीन चेकिंग के लिए रोका गया था।