Delhi Police ने शुरू किया सोशल मीडिया पर बड़ा अभियान, विरोध प्रदर्शन से जुड़े कई पोस्ट और अकाउंट हुए डिलीट

Delhi: दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से विरोध प्रदर्शन से जुड़ी पोस्ट हटाने का अभियान तेज कर दिया है। यह कार्रवाई मुख्य रूप से उन पोस्ट्स पर की जा रही है जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक भाष

Delhi: दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से विरोध प्रदर्शन से जुड़ी पोस्ट हटाने का अभियान तेज कर दिया है। यह कार्रवाई मुख्य रूप से उन पोस्ट्स पर की जा रही है जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है। पुलिस का कहना है कि यह कदम सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया है, जबकि डिजिटल राइट्स ग्रुप्स इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बता रहे हैं।

यह पूरा मामला हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए युवाओं के विरोध प्रदर्शन और 20 जुलाई 2026 को हुए ‘संसद चलो’ मार्च से जुड़ा है। यह प्रदर्शन NEET और CBSE परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर था, जो 26 जुलाई 2026 को पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद खत्म हुआ। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में ऐसी पोस्ट हटाई गई हैं जो भड़काऊ थीं। इसके अलावा, देश के बाहर से चल रहे 400 से ज्यादा सोशल मीडिया अकाउंट्स को भी ब्लॉक किया गया है।

पुलिस की एक खास टीम लगातार सोशल मीडिया की निगरानी कर रही है और आपत्तिजनक कंटेंट मिलने पर सोशल मीडिया कंपनियों को नोटिस भेज रही है। पुलिस ने आईटी एक्ट की धारा 79(3)(b) और धारा 69A का हवाला दिया है, जिसके तहत देश की सुरक्षा और सार्वजनिक शांति के लिए कंटेंट ब्लॉक किया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी Meta ने पुलिस के लगभग सभी अनुरोधों को मानकर पोस्ट हटा दिए हैं।

दूसरी तरफ, Internet Freedom Foundation (IFF) और SFLC.in जैसे संगठनों ने इस कार्रवाई की आलोचना की है। उनका कहना है कि राजनीतिक आलोचना को अपराध नहीं माना जाना चाहिए और पुलिस को यह बताना चाहिए कि किन आधारों पर पोस्ट हटवाए गए हैं। इन संगठनों का तर्क है कि प्रधानमंत्री की मानहानि एक गैर-संज्ञेय अपराध है, जिसमें पुलिस की सीधी भूमिका नहीं होनी चाहिए।

बता दें कि इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान काफी तनाव देखा गया था, जिसमें 130 पुलिसकर्मी और 65 छात्र घायल हुए थे। पुलिस ने इस मामले में 15 FIR दर्ज की हैं और प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए Facial Recognition System (FRS) कैमरों का इस्तेमाल भी किया गया है।