Delhi में संसद मार्च हिंसा पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 2,500 लोगों की हो रही जांच

Delhi: राजधानी दिल्ली में 20 जुलाई को ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस अब पूरी सख्ती दिखा रही है। पुलिस ने इस मामले में जांच तेज कर दी है और करीब 2,500 लोगों के रिकॉर्ड की जांच की जा र

Delhi: राजधानी दिल्ली में 20 जुलाई को ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस अब पूरी सख्ती दिखा रही है। पुलिस ने इस मामले में जांच तेज कर दी है और करीब 2,500 लोगों के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है ताकि हिंसा भड़काने वालों की पहचान हो सके।

यह पूरा मामला Cockroach Janta Party (CJP) द्वारा संसद की ओर निकाले गए एक अनधिकृत मार्च से जुड़ा है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी और उस समय धारा 163 (BNSS) के तहत भीड़ जमा करने पर रोक थी। पुलिस का मानना है कि 100 से 200 लोगों ने जानबूझकर पत्थरबाजी की और माहौल बिगाड़ा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने अब तक 15 FIR दर्ज की हैं। जांच के लिए Special Cell और Crime Branch की टीमों को लगाया गया है। Special Cell इस पूरी घटना के पीछे की बड़ी साजिश की जांच कर रही है, जबकि Crime Branch पत्थरबाजी और झड़पों में शामिल लोगों को पकड़ने का काम कर रही है। पुलिस अब CCTV, ड्रोन फुटेज और फेस रिकग्निशन सिस्टम का इस्तेमाल कर रही है।

जांच के मुख्य बिंदु विवरण
कुल संदिग्ध लगभग 2,500 लोग
अपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग 2,000 लोग मौके पर मिले
घायल पुलिसकर्मी 118 कर्मी (कुल)
डिजिटल सबूत 400 से ज्यादा वीडियो और चैट डेटा
ताजा गिरफ्तारी एक हिस्ट्रीशीटर पत्थरों के साथ पकड़ा गया

इस हिंसा में पुलिस के कई जवान घायल हुए हैं, जिनमें से दो IFSO यूनिट के जवान बुधवार को कनॉट प्लेस में हुए हमले में गंभीर रूप से चोटिल हुए। दिल्ली पुलिस कमिश्नर श्री Anurag Kumar ने घायल जवानों से मुलाकात की। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिसकर्मियों की सभी नियमित छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।

दूसरी तरफ, दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। कोर्ट में कुछ PIL दाखिल की गई हैं जिनमें प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा ज्यादा ताकत इस्तेमाल करने के आरोप लगाए गए हैं। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई को छात्रों के हितों की रक्षा की बात कही, लेकिन पुलिस कार्रवाई पर कोई खास टिप्पणी नहीं की। पुलिस अब सोनम वांगचुक के उन भाषणों की भी जांच कर रही है जो अस्पताल जाने के बाद रिकॉर्ड किए गए थे, ताकि पता चल सके कि उनमें कोई भड़काऊ बात तो नहीं थी।