Delhi: दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने एक बहुत बड़े फर्जी जीएसटी इनवॉइस रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह ने शेल कंपनियां बनाकर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का चूना लगाया। पुलिस ने छापेमारी के दौरान मास्टरम
Delhi: दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने एक बहुत बड़े फर्जी जीएसटी इनवॉइस रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह ने शेल कंपनियां बनाकर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का चूना लगाया। पुलिस ने छापेमारी के दौरान मास्टरमाइंड राज कुमार दीक्षित समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक मुख्य साजिशकर्ता अभी भी फरार है।
कैसे काम करता था यह फर्जी जीएसटी रैकेट?
EOW के अतिरिक्त आयुक्त रवि कुमार सिंह ने बताया कि यह गिरोह बिना किसी असली कारोबार के फर्जी बिल बनाता था। आरोपियों ने लगभग 50 फर्जी शेल कंपनियों का जाल बिछाया था। सितंबर 2025 में मेसर्स आरके एंटरप्राइजेज नाम की एक फर्जी फर्म बनाई गई, जिसके जरिए 128 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेनदेन किया गया और करीब 10 करोड़ रुपये का गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम किया गया।
छापेमारी में क्या-क्या सामान मिला?
पुलिस ने 15 मई 2026 को दिल्ली-एनसीआर में छापेमारी की, जिसमें भारी मात्रा में सबूत और कैश बरामद हुआ। जब्त किए गए सामान की लिस्ट नीचे दी गई है:
| बरामद सामान |
मात्रा/विवरण |
| नकद राशि |
51.12 लाख रुपये |
| मोबाइल फोन |
15 नग |
| लैपटॉप |
2 नग |
| अन्य |
सिम कार्ड, नकली मुहरें और जाली दस्तावेज |
| वाहन |
2 कारें |
कौन-कौन हुए गिरफ्तार और कैसे हुआ धोखा?
इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड दरियागंज का रहने वाला राज कुमार दीक्षित है, जिसने जाली दस्तावेजों से करीब 250 शेल कंपनियां बनाई थीं। उसके साथ अमर कुमार, विभाष कुमार मित्रा, नितिन वर्मा, मोहम्मद वसीम और आबिद को भी पकड़ा गया है। जांच में पता चला कि गिरोह ने एक मासूम व्यक्ति को जीएसटी विभाग में नौकरी का लालच दिया और उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड और बायोमेट्रिक विवरण का गलत इस्तेमाल कर फर्जी कंपनियां खड़ी कीं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
इस घोटाले में कुल कितनी रकम का हेरफेर हुआ?
इस रैकेट के जरिए 128 करोड़ रुपये से ज्यादा का फर्जी लेनदेन किया गया और लगभग 10 करोड़ रुपये का गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लिया गया।
इस मामले में मुख्य आरोपी कौन है?
इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड दरियागंज निवासी राज कुमार दीक्षित है, जिसने फर्जी दस्तावेजों के जरिए सैकड़ों शेल कंपनियां बनाई थीं।