Delhi में जंतर मंतर के पास पत्थरों से भरा ट्रक मिला, पुलिस ने कहा यह पहले से ही हमारी हिरासत में था

Delhi: राजधानी दिल्ली में 20 जुलाई को होने वाले ‘चलो संसद’ मार्च से पहले जंतर मंतर के पास पत्थरों से भरा एक ट्रक मिलने पर काफी विवाद हुआ। इस ट्रक को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए गए, लेकिन अब दिल्ली

Delhi: राजधानी दिल्ली में 20 जुलाई को होने वाले ‘चलो संसद’ मार्च से पहले जंतर मंतर के पास पत्थरों से भरा एक ट्रक मिलने पर काफी विवाद हुआ। इस ट्रक को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए गए, लेकिन अब दिल्ली पुलिस ने साफ किया है कि यह ट्रक पहले से ही पुलिस की हिरासत में था और इसे किसी साजिश के तहत वहां नहीं रखा गया था।

पुलिस के मुताबिक, यह ट्रक (नंबर HR63 E 6865) 16 जुलाई 2026 को फिरोज शाह रोड और कस्तूरबा गांधी मार्ग के क्रॉसिंग पर एक ईको वैन के साथ हादसे में शामिल था। इस दुर्घटना में छह से सात लोग घायल हुए थे, जिसके बाद पुलिस ने एफआईआर नंबर 65/2026 दर्ज कर ट्रक को जब्त कर लिया था। जगह की कमी की वजह से इसे शुरुआत में पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के पास खड़ा किया गया था।

20 जुलाई को होने वाले विरोध प्रदर्शन और कानून व्यवस्था को देखते हुए, पुलिस ने ट्रक मालिक को निर्देश देकर इसे खाली करवाया और सुरक्षित जगह पर शिफ्ट किया। इसी दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस ट्रक की मौजूदगी पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बदनाम करने या हिंसा भड़काने के लिए जानबूझकर पत्थरों वाला ट्रक वहां रखा था।

विवाद तब और बढ़ गया जब यह ट्रक 21 से 25 जुलाई के बीच रायसीना रोड पर इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के दफ्तर के बाहर खड़ा दिखा। IYC दिल्ली अध्यक्ष अक्षय लकरा ने वीडियो जारी कर पूछा कि जब्त किया गया ट्रक नो-एंट्री जोन में उनके ऑफिस के बाहर कई दिनों तक क्यों खड़ा रहा।

न्यू दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने इन सभी आरोपों को गलत और भ्रामक बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रक कभी प्रदर्शन स्थल तक नहीं पहुँचा था बल्कि उससे दूर था। दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी नोटिस भेजा है ताकि इस मामले में गलत जानकारी फैलाने वाली पोस्ट हटाई जा सकें। बता दें कि उस समय दिल्ली में धारा 163 (पहले की धारा 144) लागू थी और इस मार्च की अनुमति पुलिस ने नहीं दी थी।