Delhi Police पर युवाओं को अवैध रूप से हिरासत में लेने का आरोप, CJP ने 26 जुलाई को देशव्यापी कैंडल मार्च का किया ऐलान

Delhi: राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर के आसपास प्रदर्शन कर रहे युवाओं को दिल्ली पुलिस द्वारा अवैध रूप से हिरासत में लिए जाने का मामला गरमा गया है। ANIDEL Cockroach Janta Party (CJP) ने पुलिस पर बर्बरता के आरोप लगाते हुए चे

Delhi: राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर के आसपास प्रदर्शन कर रहे युवाओं को दिल्ली पुलिस द्वारा अवैध रूप से हिरासत में लिए जाने का मामला गरमा गया है। ANIDEL Cockroach Janta Party (CJP) ने पुलिस पर बर्बरता के आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि वे पुलिस मुख्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस तनाव के बीच CJP ने 26 जुलाई को शाम 6 बजे देशभर में कैंडल मार्च निकालने का आह्वान किया है, जिसमें लोगों से अपने जिला कलेक्टर ऑफिस पर इकट्ठा होने की अपील की गई है।

CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया कि पिछले 2-3 दिनों से कई युवा प्रदर्शनकारियों को बिना किसी कानूनी आधार के हिरासत में रखा गया है। उनका कहना है कि पुलिस न केवल आम नागरिकों को डरा रही है, बल्कि प्रदर्शन स्थल पर भोजन और जरूरी सामान पहुंचने से भी रोक रही है। CJP ने यह भी कहा कि वे उन पुलिसकर्मियों की लिस्ट तैयार कर रहे हैं जिन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ ज्यादा सख्ती बरती है।

दूसरी तरफ, Delhi Police ने इन सभी आरोपों को गलत और भ्रामक बताया है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़े और निषेधाधिकार आदेशों का उल्लंघन किया, जिससे पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस ने यह भी जानकारी दी है कि उन्होंने Facial Recognition System (FRS) कैमरों के जरिए जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन में शामिल 2,000 से अधिक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की पहचान की है। साथ ही, सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने वाले पाकिस्तान स्थित 480 अकाउंट्स को ब्लॉक किया गया है।

यह पूरा विवाद NEET परीक्षा में गड़बड़ियों और पेपर लीक के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है। इसी दबाव के चलते केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया और युवाओं के नाम एक बयान जारी किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पेपर लीक करने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाने का ऐलान किया है। वहीं, इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है और अगली सुनवाई सितंबर 2026 में होगी।

इस आंदोलन में एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी शामिल थे, जिन्हें 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने जबरन अस्पताल पहुंचाया था। उनकी पत्नी ने इसे अवैध हिरासत बताया था, हालांकि अदालत ने उन्हें रिहा करने की याचिका खारिज कर दी थी।