Delhi Police ने शुरू किया ‘बाल संरक्षण माह-2026’, स्कूलों में छात्राओं को सिखाया साइबर सुरक्षा और आत्मरक्षा का तरीका

Delhi: दिल्ली में बच्चों और खासकर बेटियों की सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। ‘बाल संरक्षण माह-2026’ के तहत अब शहर के स्कूलों में बच्चों को उनकी सुरक्षा और कानूनी अधिकारों के बारे म

Delhi: दिल्ली में बच्चों और खासकर बेटियों की सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। ‘बाल संरक्षण माह-2026’ के तहत अब शहर के स्कूलों में बच्चों को उनकी सुरक्षा और कानूनी अधिकारों के बारे में बताया जा रहा है। इस मुहिम का मकसद बच्चों को साइबर क्राइम से बचाना और उन्हें इतना मजबूत बनाना है कि वे अपनी रक्षा खुद कर सकें।

हाल ही में आउटर नॉर्थ जिले में एक बड़ा काउंसलिंग सेशन आयोजित किया गया, जिसमें 151 स्कूलों की 400 से ज्यादा छात्राओं ने हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में उत्तरी रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त विजय सिंह मुख्य अतिथि थे। छात्राओं को व्यक्तिगत सुरक्षा, साइबर अपराधों से बचाव और आत्मरक्षा के गुर सिखाए गए। कार्यक्रम में कई स्कूलों के प्रिंसिपल, टीचर और सामाजिक संगठनों के लोग भी मौजूद थे।

यह अभियान 1 जुलाई 2026 से शुरू हुआ है और पूरे जुलाई महीने तक चलेगा। दिल्ली सरकार और पुलिस ने मिलकर तय किया है कि शहर के सभी 5,633 स्कूलों में ‘बाल संरक्षण समितियां’ बनाई जाएंगी। साथ ही, स्कूलों को एक सेफ्टी चेकलिस्ट लागू करनी होगी जो NCPCR और POCSO एक्ट के नियमों के मुताबिक हो।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने इस बात पर जोर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा केवल एक महीने का अभियान नहीं, बल्कि इसे स्थाई सिस्टम बनाना होगा। मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि दिल्ली के हर स्कूल में ‘गुड टच और बैड टच’ को लेकर जागरूकता सेशन कराए जाएंगे।

सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए कुछ कड़े कदम उठाए गए हैं:

  • हर जिले में एक Addl. DCP को नोडल ऑफिसर बनाया गया है जो बच्चों के सुरक्षा मामलों की निगरानी करेंगे।
  • टीचर्स और स्कूल स्टाफ को POCSO एक्ट की ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे बच्चों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को पहचान सकें।
  • शिक्षा विभाग और पुलिस की जॉइंट टीमें स्कूलों में अचानक जाकर सुरक्षा मानकों की जांच करेंगी।
  • पहली बार अपराध करने वाले किशोर अपराधियों को जेल के बजाय काउंसलिंग और रिहैबिलिटेशन के जरिए समाज में वापस लाने की कोशिश की जाएगी।

पुलिस ने निर्देश दिए हैं कि POCSO एक्ट से जुड़े मामलों में तुरंत और तालमेल के साथ कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, बच्चों को पुलिस स्टेशनों का भ्रमण कराया जा रहा है और उन्हें ट्रैफिक नियमों की जानकारी भी दी जा रही है।