Delhi में बच्चों की तस्करी का बड़ा रैकेट बस्तर, 8 लाख में बिक रहे थे लड़के, 13 लोग गिरफ्तार
Delhi: दिल्ली पुलिस ने बच्चों की तस्करी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गैंग के सदस्य राजस्थान और गुजरात के गरीब परिवारों से नवजात बच्चों को खरीदकर निसंतान जोड़ों को महंगे दामों पर बेचते थे। प
Delhi: दिल्ली पुलिस ने बच्चों की तस्करी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गैंग के सदस्य राजस्थान और गुजरात के गरीब परिवारों से नवजात बच्चों को खरीदकर निसंतान जोड़ों को महंगे दामों पर बेचते थे। पुलिस ने इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया है और 5 मासूम बच्चों को सुरक्षित बचा लिया है।
यह पूरा मामला तब खुला जब 5 जून 2026 को पहारगंज के RK Ashram मेट्रो स्टेशन के पास एक डमी ऑपरेशन चलाया गया। जांच में पता चला कि यह गिरोह पिछले करीब डेढ़ साल से सक्रिय था। स्पेशल कमिश्नर देवेश चंद्र श्रीवास्तव और डीसीपी (सेंट्रल) रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि यह नेटवर्क बहुत ही संगठित तरीके से काम कर रहा था। पकड़े गए लोगों में मुख्य तस्कर ज्योति उर्फ कमलेश और गिरोह का सरगना सायबाभाई घमर उर्फ कालिया शामिल हैं। कालिया राजस्थान और गुजरात के आदिवासी इलाकों से बच्चों की सप्लाई करता था।
इस रैकेट में दिल्ली के रोहिणी इलाके के बेगमपुर स्थित हीरा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के मालिक डॉ. विवेकी की भी भूमिका सामने आई है। आरोप है कि अस्पताल का इस्तेमाल बच्चों को रखने और खरीदारों की पहचान करने के लिए किया जाता था। पुलिस ने इस मामले में ग्वालियर (MP) और पानीपत (Haryana) से भी कुछ जोड़ों को गिरफ्तार किया है जिन्होंने अवैध तरीके से बच्चे खरीदे थे।
तस्करी के तरीके और पैसों का हिसाब इस प्रकार था:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| बच्चों की खरीद कीमत | 10,000 से 20,000 रुपये (गरीब माता-पिता से) |
| लड़कों की बिक्री कीमत | 6 लाख से 8 लाख रुपये |
| लड़कियों की बिक्री कीमत | 3 लाख से 4 लाख रुपये |
| कुल गिरफ्तार लोग | 13 (तस्कर, बिचौलिए, खरीदार और डॉक्टर) |
| बचाए गए बच्चे | 5 (उम्र 5 दिन से 4 महीने तक) |
| कुल तस्करी का अनुमान | पिछले 18 महीनों में करीब 30 बच्चे |
पुलिस ने मौके से 3 लाख रुपये से ज्यादा कैश बरामद किया है, जिसमें से 2.92 लाख रुपये एक नवजात बच्चे को खरीदने के लिए रखे गए थे। गिरोह के लोग फर्जी मेडिकल और जन्म प्रमाण पत्र बनाकर बच्चों के माता-पिता के नाम बदलते थे ताकि कोई शक न हो। फिलहाल बचाए गए पांचों बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की देखरेख में रखा गया है। पुलिस अब गुजरात के अन्य एजेंटों और उन जैविक माता-पिता की तलाश कर रही है जिनसे बच्चे खरीदे गए थे।