Delhi: दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने एक बहुत बड़े साइबर फ्रॉड गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गैंग अलग-अलग राज्यों में फर्जी कंपनियों और बैंक खातों के जरिए लोगों को ठग रहा था। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया
Delhi: दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने एक बहुत बड़े साइबर फ्रॉड गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गैंग अलग-अलग राज्यों में फर्जी कंपनियों और बैंक खातों के जरिए लोगों को ठग रहा था। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है जो कंपनी में सिर्फ नाम के डायरेक्टर थे।
कैसे काम करता था यह फ्रॉड नेटवर्क?
पुलिस के मुताबिक यह गैंग बहुत ही शातिर तरीके से काम कर रहा था। इन्होंने Messit Tradex Pvt Ltd जैसी शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया। मासूम लोगों को नौकरी या कमीशन का लालच देकर उन्हें कंपनी का डमी डायरेक्टर बनाया जाता था, ताकि असली मास्टरमाइंड पर्दे के पीछे रह सके। बैंक खातों का कंट्रोल बाहरी हैंडलर्स के पास रहता था।
कितने पैसे का घोटाला और कितनी शिकायतें?
इस मामले में पैसों का लेन-देन बहुत तेजी से हुआ। पुलिस ने जांच में पाया कि सिर्फ एक बैंक खाते के जरिए 8 दिनों के अंदर 16 करोड़ रुपये से ज्यादा घुमाए गए। इस नेटवर्क से जुड़ी मुख्य जानकारियां नीचे दी गई हैं:
| विवरण |
जानकारी |
| कुल रकम |
16 करोड़ रुपये से ज्यादा |
| कुल शिकायतें |
336 (पूरे भारत से) |
| गिरफ्तार आरोपी |
सोनू कुमार और अमिंदर सिंह |
| शेल कंपनियां |
35 से ज्यादा संदिग्ध कंपनियां |
| कानूनी धाराएं |
BNS की धारा 112, 317(2), और 317(5) |
पुलिस को कैसे मिली खबर?
DCP (Outer North) हरेश्वर स्वामी ने बताया कि नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और I4C के समन्वय पोर्टल से मिली जानकारी के बाद यह कार्रवाई हुई। पुलिस ने पाया कि कई अलग-अलग राज्यों से आई शिकायतों का संबंध एक ही कंपनी के बैंक खाते से था, जिसके बाद इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया गया।
Frequently Asked Questions (FAQs)
इस मामले में कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
पुलिस ने सोनू कुमार और अमिंदर सिंह नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जो कंपनी में डमी डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे।
यह गिरोह लोगों को कैसे फंसाता था?
यह गिरोह भोले-भाले लोगों को नौकरी या कमीशन का लालच देकर उन्हें फर्जी कंपनियों का डायरेक्टर बनाता था और उनके नाम पर बैंक खाते इस्तेमाल करता था।