Delhi में मुफ्त बस सफर के लिए 1 अगस्त से जरूरी होगा पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड, अब नहीं मिलेंगे पेपर टिकट
Delhi: दिल्ली की महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए मुफ्त बस यात्रा का तरीका अब बदलने जा रहा है। अब तक सफर के लिए मिलने वाले कागज के पिंक टिकट की जगह ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ का इस्तेमाल करना होगा। 1
Delhi: दिल्ली की महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए मुफ्त बस यात्रा का तरीका अब बदलने जा रहा है। अब तक सफर के लिए मिलने वाले कागज के पिंक टिकट की जगह ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ का इस्तेमाल करना होगा। 1 अगस्त 2026 से यह कार्ड अनिवार्य कर दिया जाएगा, जिसके बिना मुफ्त यात्रा की सुविधा नहीं मिलेगी।
इस कार्ड की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 2 मार्च 2026 को की थी और कार्ड बांटने का काम 3 मार्च से शुरू हो गया था। दिल्ली सरकार ने इसे डिजिटल सिस्टम बनाने के लिए लागू किया है ताकि सफर में पारदर्शिता और आसानी रहे। जो महिलाएं अभी भी पुराने पेपर टिकट का इस्तेमाल कर रही हैं, वे 31 जुलाई 2026 तक इसका लाभ ले सकेंगी, लेकिन उसके बाद केवल स्मार्ट कार्ड ही काम करेगा।
यह कार्ड सिर्फ बस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक National Common Mobility Card (NCMC) है। इसका मतलब है कि महिलाएं इसे रिचार्ज कराकर Delhi Metro और नमो भारत (RRTS) में भी इस्तेमाल कर सकेंगी। इसके अलावा, डेबिट कार्ड फीचर होने की वजह से इसका उपयोग दुकानों पर भुगतान करने के लिए भी किया जा सकेगा। बस में सफर के दौरान इसे बस इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन (ETM) पर बस टच करना होगा और सफर शुरू हो जाएगा।
कार्ड बनवाने के लिए दिल्ली की निवासी महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के पास आधार कार्ड या वोटर आईडी जैसा पहचान पत्र होना जरूरी है, जिसमें दिल्ली का पता हो। पहला कार्ड मुफ्त दिया जा रहा है, लेकिन अगर कार्ड खो जाता है या टूट जाता है, तो नया कार्ड बनवाने के लिए 59 रुपये देने होंगे।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| अनिवार्य तारीख | 1 अगस्त 2026 |
| पात्रता | दिल्ली की निवासी महिला और ट्रांसजेंडर (5/12 साल से ऊपर) |
| जरूरी दस्तावेज | आधार कार्ड या वोटर आईडी (दिल्ली एड्रेस के साथ) |
| कार्ड की कीमत | पहला कार्ड मुफ्त, दूसरा 59 रुपये |
| कहाँ बनेगा | DTC डिपो और विशेष कैंप |
| समय | सुबह 9:00 से शाम 5:00 बजे तक (सोमवार से शनिवार) |
परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने बताया कि इस बदलाव का मकसद सिस्टम को ज्यादा बेहतर और जवाबदेह बनाना है। सरकार ने शहर में 50 अधिकृत केंद्र बनाए हैं ताकि लोग आसानी से कार्ड बनवा सकें। अब तक करीब 11 से 15 लाख कार्ड बांटे जा चुके हैं। जिन यात्रियों के पास 1 अगस्त तक यह कार्ड नहीं होगा, उन्हें बसों में नियमित टिकट खरीदना होगा।