Delhi-Pauri हाईवे पर गड्ढे बने शिवभक्तों के लिए खतरा, कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन ने जारी किए नए नियम
UP/Uttarakhand: श्रावण मास में कांवड़ यात्रा शुरू हो गई है, लेकिन दिल्ली-पौड़ी राजमार्ग की खराब हालत शिवभक्तों की सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता बन गई है। सड़क पर गहरे गड्ढे हैं और प्रशासन के गड्ढा मुक्त मार्ग के दावे फेल नजर
UP/Uttarakhand: श्रावण मास में कांवड़ यात्रा शुरू हो गई है, लेकिन दिल्ली-पौड़ी राजमार्ग की खराब हालत शिवभक्तों की सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता बन गई है। सड़क पर गहरे गड्ढे हैं और प्रशासन के गड्ढा मुक्त मार्ग के दावे फेल नजर आ रहे हैं। बारिश की वजह से हालात और बिगड़ गए हैं, जिससे दोपहिया वाहनों के फिसलने और दुर्घटनाओं का डर बढ़ गया है।
मेरठ में दिल्ली रोड, हापुड़ रोड और गढ़ रोड पर गहरे गड्ढे आम यात्रियों और कांवड़ियों के लिए खतरा बने हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कांवड़ यात्रा के सभी रास्तों को जल्द से जल्द गड्ढा मुक्त किया जाए। इसके साथ ही पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने और सीसीटीवी कैमरे लगाने के आदेश दिए गए हैं।
कांवड़ यात्रा 2026 के लिए यातायात के कुछ कड़े नियम तय किए गए हैं। नव-निर्मित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल पैदल यात्रियों और डाक कांवड़ वाहनों के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा क्योंकि यह हाई-स्पीड रोड है। पैदल यात्री ऊपरी गंगा नहर मार्ग का उपयोग करेंगे और डाक कांवड़ वाहन पुराने NH-34 मार्ग से जाएंगे।
| तारीख | प्रतिबंध और नियम | प्रभावित क्षेत्र |
|---|---|---|
| 30 जुलाई से | भारी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित | दिल्ली-हरिद्वार हाईवे और गंगा नहर रोड |
| 4 अगस्त से 12 अगस्त | सभी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद | दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग |
| 7 अगस्त से 12 अगस्त | सामान्य यातायात बंद (एक लेन तीर्थयात्रियों के लिए) | दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (UP हिस्सा) |
| 29 जुलाई से | भारी वाहनों पर प्रतिबंध | गाजियाबाद |
| 5 अगस्त से 12 अगस्त | हल्के वाहनों पर प्रतिबंध | गाजियाबाद |
NHAI ने इस यात्रा को सुचारू बनाने के लिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड प्रशासन के साथ बैठकें की हैं ताकि जलभराव और गड्ढों की समस्या को सुलझाया जा सके। वहीं उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण कई जगह भूस्खलन हुआ है और देहरादून के पास मालदेवता में एक नया पुल ढह गया है, जिससे सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं।