Delhi में संसद के पास हिंसा पर पहली FIR दर्ज, हत्या के प्रयास की धाराएं लगाई गईं
Delhi: राजधानी दिल्ली में 20 जुलाई को संसद के पास हुए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने पहली FIR दर्ज कर ली है। इस मामले में प्रदर्शनकारियों पर हत्या के प्रयास समेत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर ध
Delhi: राजधानी दिल्ली में 20 जुलाई को संसद के पास हुए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने पहली FIR दर्ज कर ली है। इस मामले में प्रदर्शनकारियों पर हत्या के प्रयास समेत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस ने घटनाक्रम का पूरा ब्यौरा देते हुए बताया है कि भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया था।
यह FIR कर्तव्य पथ पुलिस स्टेशन में एक इंस्पेक्टर की शिकायत पर दर्ज की गई है। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों को उकसाकर बैरिकेड्स तोड़ने और संसद की तरफ बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया था। शिकायत के मुताबिक, भीड़ ने पुलिसकर्मियों को घेर लिया और उन पर जान से मारने की नीयत से पत्थर और चप्पलें फेंकीं। हालात को काबू करने और संसद की सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिस को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
इस हिंसा में दिल्ली पुलिस के करीब 130 जवान और लगभग 65 छात्र घायल हुए हैं। पुलिस ने अब तक इस पूरे प्रदर्शन से जुड़ी कुल 15 FIR दर्ज की हैं। इस मामले में ACP विवेक भगत, हेड कांस्टेबल राहुल और कांस्टेबल दीपक जैसे पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
फिलहाल दिल्ली पुलिस अपनी जांच तेज कर चुकी है और करीब 2,500 लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है ताकि दंगाइयों की पहचान की जा सके। पुलिस को शक है कि 100 से 200 लोगों ने ही इस पूरी भीड़ को उकसाया और हिंसा फैलाई। पहचान के लिए CCTV फुटेज, ड्रोन वीडियो और तस्वीरों की जांच की जा रही है। पुलिस ने एक हिस्ट्रीशीटर को भी पकड़ा है जिसके पास पत्थरों से भरा बैग था।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि प्रदर्शन के समय धारा 163 (BNSS) के तहत पाबंदी लागू थी और पुलिस ने बार-बार घोषणा की थी कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। पुलिस अब उन भाषणों की भी जांच करेगी जो सोनम वांगचुक के अस्पताल जाने के बाद दिए गए थे, ताकि पता चल सके कि उनमें भड़काऊ बातें तो नहीं थीं।