Delhi में संसद मार्च हिंसा का खुलासा, 101 हत्या के आरोपी और 989 अपराधी शामिल; पुलिस करेगी सख्त कार्रवाई
Delhi: 20 जुलाई को संसद की ओर निकले मार्च में हुई हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ में बड़ी संख्या में ऐसे लोग शामिल थे जिनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा
Delhi: 20 जुलाई को संसद की ओर निकले मार्च में हुई हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ में बड़ी संख्या में ऐसे लोग शामिल थे जिनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। पुलिस ने बताया कि इस भीड़ में हत्या, डकैती और यौन शोषण जैसे गंभीर अपराधों के आरोपी भी मौजूद थे।
पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने 28 जुलाई 2026 को सरकार को सौंपी रिपोर्ट में बताया कि अधिकारियों पर हमला करने और गाड़ियों में तोड़फोड़ करने वाले 2,873 लोगों की जांच की गई। इनमें से 989 लोग ऐसे मिले जिन पर पहले से ही संगीन अपराधों के केस दर्ज थे। पुलिस अब इन अपराधियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी, जबकि छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म कर दिया जाएगा।
| अपराध का प्रकार | आरोपियों की संख्या |
|---|---|
| हत्या (Murder) | 101 |
| डकैती और लूट (Dacoity/Robbery) | 284 |
| यौन शोषण और महिलाओं/बच्चों के खिलाफ अपराध | 92 |
| रेप (Rape) | 61 |
| छेड़छाड़ (Molestation) | 25 |
| POCSO एक्ट | 6 |
| आर्म्स एक्ट (Arms Act) | 229 |
| स्नैचिंग (Snatching) | 135 |
| किडनैपिंग (Kidnapping) | 19 |
| NDPS एक्ट (नशीले पदार्थ) | 67 |
पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, हत्या के आरोपी 101 लोगों में से 42 लोग ऐसे थे जिन पर दो या उससे ज्यादा केस दर्ज थे, जबकि 12 लोगों का इतिहास इतना खराब था कि उन पर 10 से ज्यादा मामले दर्ज थे। इस पूरे मामले में दिल्ली पुलिस ने कम से कम 15 FIR दर्ज की हैं। 25 जुलाई को दर्ज एक FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1) के तहत हत्या के प्रयास का मामला भी जोड़ा गया है।
DCP सेंट्रल रोहित राजबीर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई थी और धारा 163 (BNSS) के तहत पाबंदी लागू थी। उन्होंने कहा कि जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की, तब उन्हें रोकने के लिए हल्का लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने पैलेट गन के इस्तेमाल के दावों को पूरी तरह गलत बताया है।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट 28 जुलाई 2026 को पुलिस की कार्रवाई और पेपर लीक के विरोध में हुए इन प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। वहीं, बिहार पुलिस ने ऐलान किया है कि वहां के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी और गिरफ्तार लोगों को रिहा कर दिया जाएगा।