Delhi: भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली से पलवल (PWL) रूट पर KAVACH 4.0 सिस्टम को सफलतापूर्वक शुरू कर दिया गया है। यह एक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है जो ट्रेनों को आपस में ट
Delhi: भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली से पलवल (PWL) रूट पर KAVACH 4.0 सिस्टम को सफलतापूर्वक शुरू कर दिया गया है। यह एक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है जो ट्रेनों को आपस में टकराने से रोकने में मदद करेगा, जिससे दिल्ली और आसपास के इलाकों से सफर करने वाले लाखों लोगों को फायदा होगा।
KAVACH 4.0 सिस्टम में क्या खास है और कैसे काम करता है
KAVACH एक स्वदेशी तकनीक है जिसे SIL-4 सेफ्टी लेवल का सर्टिफिकेट मिला है। यह सिस्टम लोको पायलट की मदद करता है ताकि ट्रेन तय रफ्तार सीमा के अंदर रहे। अगर ट्रेन की स्पीड ज्यादा होती है या आगे कोई खतरा होता है, तो यह सिस्टम अपने आप ब्रेक लगा देता है। यह घने कोहरे जैसे कम विजिबिलिटी वाले मौसम में भी ट्रेनों को सुरक्षित चलाने में मददगार साबित होता है।
दिल्ली-पलवल रूट पर क्या-क्या लगाया गया
इस प्रोजेक्ट के तहत रेलवे ने रूट पर कई तकनीकी बदलाव किए हैं ताकि सिस्टम सही से काम करे। इसकी मुख्य जानकारी नीचे दी गई है:
| विवरण |
जानकारी |
| रूट किलोमीटर |
21.6 किमी सेक्शन |
| पहचान टैग (RFID Tags) |
1200 से ज्यादा |
| संचार टावर |
4 टावर |
| नेटवर्क |
ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क |
पूरे देश में KAVACH का विस्तार और भविष्य की योजना
रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने बताया कि देशभर में KAVACH के काम में तेजी लाई जा रही है। अब तक 3,103 रूट किलोमीटर पर इसे लगाया जा चुका है और करीब 24,427 रूट किलोमीटर पर काम चल रहा है। रेलवे का लक्ष्य अगले दो साल में 9,000 रूट किलोमीटर और इसे बढ़ाना है। इसके अलावा ‘सुरक्षा’ नाम का एक AI प्लेटफॉर्म भी तैयार किया जा रहा है, जिससे ट्रैफिक कंट्रोलर रियल-टाइम में ट्रेनों की निगरानी कर सकेंगे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
KAVACH 4.0 सिस्टम का मुख्य काम क्या है?
यह सिस्टम ट्रेनों को आपस में टकराने से रोकता है और लोको पायलट द्वारा स्पीड लिमिट तोड़ने पर अपने आप ब्रेक लगा देता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कम हो जाता है।
KAVACH 4.0 किन बड़े रूटों पर लागू किया गया है?
KAVACH 4.0 को दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे हाई-डेंसिटी कॉरिडोर पर लगाया गया है, जिसमें पलवल-मथुरा-नागदा सेक्शन भी शामिल है।