Delhi में खुले नालों और गड्ढों ने ली कई जान, प्रशासन की लापरवाही से लोग हो रहे हादसे का शिकार

Delhi: राजधानी दिल्ली में खुले नाले और निर्माण कार्यों के दौरान छोड़े गए गहरे गड्ढे आम लोगों के लिए काल बन रहे हैं। मानसून की बारिश के बाद जलभराव की वजह से ये खतरनाक गड्ढे पानी के नीचे छिप जाते हैं, जिससे राहगीरों को पता

Delhi: राजधानी दिल्ली में खुले नाले और निर्माण कार्यों के दौरान छोड़े गए गहरे गड्ढे आम लोगों के लिए काल बन रहे हैं। मानसून की बारिश के बाद जलभराव की वजह से ये खतरनाक गड्ढे पानी के नीचे छिप जाते हैं, जिससे राहगीरों को पता नहीं चलता और वे सीधे इनमें गिर जाते हैं। हाल ही में हुई कई मौतों ने सरकारी विभागों और ठेकेदारों की बड़ी लापरवाही को सामने ला दिया है।

Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में बुनियादी ढांचे की कमजोरी और सुरक्षा नियमों की अनदेखी की वजह से कई युवा और बच्चे अपनी जान गंवा चुके हैं। मानसून के दौरान जलभराव की समस्या और बढ़ जाती है, जिससे खुले मैनहोल और गहरे गड्ढे जानलेवा साबित होते हैं। कई जगहों पर लगाए गए अस्थायी बैरिकेड्स टूट जाते हैं और चेतावनी देने वाली लाइटें काम नहीं करती हैं।

इस लापरवाही का असर आंकड़ों में भी दिखता है। साल 2024 और 2025 के बीच दिल्ली के राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार, खुले नालों, नहरों या जलभराव वाले अंडरपास में गिरने से 89 लोगों की मौत हुई। कुल मिलाकर नागरिक लापरवाही या आपदाओं के कारण 239 मौतें दर्ज की गईं। जुलाई 10, 2026 को भारी बारिश के दौरान दिल्ली-एनसीआर में तीन लोगों की मौत हुई, जिनमें दो छोटे बच्चे शामिल थे। इससे पहले मई 2026 में मुकुंदपुर में एक दो साल की बच्ची की खुले नाले में गिरने से मौत हो गई थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के एक जूनियर इंजीनियर को बर्खास्त कर दिया था।

राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे पर टकराव जारी है। आम आदमी पार्टी ने बीजेपी के नेतृत्व वाले MCD पर ‘आपराधिक लापरवाही’ का आरोप लगाया है। रोहिणी, बुराड़ी और दिलशाद गार्डन जैसे इलाकों में हुई मौतों के बाद विपक्ष ने पीड़ित परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की है। वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर कड़ी नाराजगी जताई है। अगस्त 2024 में गाजीपुर में मां-बेटे की मौत के बाद कोर्ट ने MCD की अक्षमता पर सवाल उठाए थे।

सुरक्षा बढ़ाने के लिए सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं। दिसंबर 2025 में दिल्ली सरकार ने ‘दिल्ली व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति नियम 2025’ का ड्राफ्ट जारी किया, ताकि निर्माण स्थलों और फैक्ट्रियों में सुरक्षा कड़ी की जा सके। अक्टूबर 2023 में लेबर डिपार्टमेंट ने निर्माण श्रमिकों के लिए एक सेफ्टी मैनुअल भी जारी किया था। हालांकि, जमीन पर इन नियमों का पालन न होना और मैनहोल का खुला रहना आज भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है।