Delhi: राजधानी दिल्ली के नाइट शेल्टर में सरकारी पैसों की बड़ी हेराफेरी का मामला सामने आया है। CBI ने जांच के बाद एक FIR दर्ज की है जिसमें ‘ghost employee’ यानी फर्जी कर्मचारियों के जरिए पैसे हड़पने का आरोप लग
Delhi: राजधानी दिल्ली के नाइट शेल्टर में सरकारी पैसों की बड़ी हेराफेरी का मामला सामने आया है। CBI ने जांच के बाद एक FIR दर्ज की है जिसमें ‘ghost employee’ यानी फर्जी कर्मचारियों के जरिए पैसे हड़पने का आरोप लगाया गया है। यह पूरा मामला दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) के तहत चलने वाले रैनबसेरों से जुड़ा है।
क्या है यह पूरा घोटाला और कैसे हुआ फर्जीवाड़ा
CBI की जांच में पता चला है कि नाइट शेल्टर चलाने वाली एजेंसियों ने कागजों पर फर्जी केयरटेकर और सफाईकर्मी भर्ती किए थे। इन फर्जी कर्मचारियों के बैंक खातों में नियमित रूप से सैलरी भेजी जाती थी, जिसे बाद में निकालकर कैश में संस्था चलाने वालों को वापस दे दिया जाता था। जांच में यह भी मिला कि कई लोग जो कर्मचारी दिखाए गए थे, वे असल में दूसरे बिजनेस या नौकरी कर रहे थे। मोबाइल लोकेशन और फॉरेंसिक जांच से यह साफ हो गया कि वे लोग कभी शेल्टर होम में मौजूद ही नहीं थे।
कौन-कौन लोग और संस्थाएं इस मामले में फंसे
इस घोटाले में Sofia Educational and Welfare Society नाम की NGO मुख्य रूप से शामिल है, जिसे 2023 में क्लस्टर 1 और 2 के शेल्टर चलाने का ठेका मिला था। FIR में इस सोसाइटी के प्रेसिडेंट सुहैल खान, उनके सहयोगी आमिर और सोनू कुशवाहा का नाम शामिल है। इसके अलावा कुछ सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों पर भी मिलीभगत का आरोप है क्योंकि DUSIB के अधिकारियों ने जरूरी निरीक्षण नहीं किए, जिससे यह धोखाधड़ी चलती रही।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और वर्तमान स्थिति
इस मामले ने राजनीतिक मोड़ ले लिया है। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इसे 250 करोड़ रुपये का घोटाला बताते हुए AAP सरकार पर निशाना साधा है और ACB जांच की मांग की है। वहीं, AAP का कहना है कि शहरी विकास मंत्री सौरभ भारद्वाज ने पहले ही DUSIB में भ्रष्टाचार की शिकायतें की थीं, लेकिन LG ने उस पर कोई एक्शन नहीं लिया। फिलहाल CBI बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है ताकि पता चल सके कि कुल कितनी रकम निकाली गई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
घोस्ट एम्प्लॉई (Ghost Employee) घोटाले का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि कागजों पर ऐसे कर्मचारियों की भर्ती दिखाना जो असल में वहां काम नहीं कर रहे थे। उनके नाम पर सरकारी सैलरी ली जाती थी और फिर उसे निजी तौर पर हड़प लिया जाता था।
CBI ने इस मामले में किन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है?
CBI ने Sofia Educational and Welfare Society के प्रेसिडेंट सुहैल खान, उनके सहयोगियों आमिर और सोनू कुशवाहा के साथ-साथ कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है।