Delhi में अब बनेंगी ऊंची इमारतें, नई पॉलिसी से हाई-राइज हाउसिंग का रास्ता साफ, आर्किटेक्ट्स ने जताई चिंता

Delhi: दिल्ली में अब ऊंची इमारतों का दौर शुरू होने जा रहा है। सरकार ने प्लानिंग नियमों में बड़े बदलाव किए हैं जिससे शहर में हाई-राइज हाउसिंग के लिए नए रास्ते खुल गए हैं। यह कदम बढ़ते शहरीकरण और जमीन की कमी को देखते हुए उ

Delhi: दिल्ली में अब ऊंची इमारतों का दौर शुरू होने जा रहा है। सरकार ने प्लानिंग नियमों में बड़े बदलाव किए हैं जिससे शहर में हाई-राइज हाउसिंग के लिए नए रास्ते खुल गए हैं। यह कदम बढ़ते शहरीकरण और जमीन की कमी को देखते हुए उठाया गया है, ताकि लोग कम जगह में ज्यादा बेहतर तरीके से रह सकें।

केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बताया कि शहर में जमीन कम है, इसलिए अब वर्टिकल विस्तार यानी ऊंची इमारतों की जरूरत है। नए नियमों के तहत अब मेट्रो और RRTS कॉरिडोर के आसपास 500 मीटर के दायरे में करीब 207 वर्ग किलोमीटर इलाके को ‘ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट’ (TOD) जोन बनाया गया है। यहां अब ज्यादा ऊंचाई वाली और मिक्स-यूज बिल्डिंग्स बन सकेंगी।

पुनर्विकास (Redevelopment) के नियमों को भी आसान बनाया गया है। पहले इसके लिए कम से कम एक हेक्टेयर जमीन होनी चाहिए थी, लेकिन अब इसे घटाकर 2,000 वर्ग मीटर कर दिया गया है। साथ ही, फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) को बढ़ाकर 500 तक कर दिया गया है, जिससे बिल्डरों और मकान मालिकों को ज्यादा निर्माण की जगह मिलेगी। केंद्र सरकार एक ऐसी योजना पर भी काम कर रही है जिससे हाई-राइज रिहायशी इमारतों को मेट्रो स्टेशनों से सीधे ‘हैंगिंग वे’ या ऊंचे रास्तों के जरिए जोड़ा जा सके, ताकि सड़कों पर जाम कम हो।

हालांकि, आर्किटेक्ट्स ने इस बदलाव पर एक बड़ी चेतावनी दी है। हर्षल कावडीकर जैसे विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऊंची इमारतों के साथ-साथ सड़कों, पानी की सप्लाई, नालियों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसी बुनियादी सुविधाओं को नहीं सुधारा गया, तो पहले से ही भीड़भाड़ वाले इलाकों में हालात और खराब हो जाएंगे। उनका मानना है कि बिना इंफ्रास्ट्रक्चर के सिर्फ ऊंचाई बढ़ाने से मोहल्लों पर दबाव बढ़ेगा।

सुरक्षा को लेकर भी दिल्ली सरकार सख्त रुख अपना रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नियमों का उल्लंघन करने वाली ऊंची इमारतों को तुरंत सील करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने फिक्स ग्लास खिड़कियों को खतरनाक बताया है और अब सभी इमारतों में खुलने वाली खिड़कियां और बालकनी अनिवार्य कर दी हैं ताकि आपात स्थिति में लोग बाहर निकल सकें। MCD को निर्देश दिया गया है कि वे ड्रोन सर्वे और सैटेलाइट मैपिंग के जरिए हर तीन महीने में निर्माण रिकॉर्ड अपडेट करें।

आग से बचाव के लिए भी नए नियम लाए जा रहे हैं। पावर मिनिस्टर आशीष सूद ने बताया कि अब 17 मीटर से कम ऊंचाई वाली इमारतों में भी फायर सेफ्टी नियमों को सख्ती से लागू करने का प्रस्ताव है। दिल्ली फायर सर्विस ने सभी रिहायशी इमारतों में स्मोक डिटेक्टर और फायर एक्सटिंगुइशर अनिवार्य करने की सिफारिश की है। सरकार ने बजट 2026-27 में फायर डिपार्टमेंट के लिए 674 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जो पिछले साल से 30 प्रतिशत ज्यादा है।