Delhi-NCR: दिल्ली और आसपास के इलाकों में गर्मी ने दस्तक दे दी है। IMD के मुताबिक अगले कुछ दिनों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है, जिससे लू जैसी स्थिति बन सकती है। गर्मी के साथ-साथ हवा की क्वालिटी भी खराब ह
Delhi-NCR: दिल्ली और आसपास के इलाकों में गर्मी ने दस्तक दे दी है। IMD के मुताबिक अगले कुछ दिनों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है, जिससे लू जैसी स्थिति बन सकती है। गर्मी के साथ-साथ हवा की क्वालिटी भी खराब हुई है, जिसके कारण प्रशासन ने जरूरी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
अगले कुछ दिनों में कैसा रहेगा तापमान
मौसम विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों के लिए तापमान का अनुमान जारी किया है। 16 अप्रैल को सफदरजंग में तापमान 40.3 डिग्री तक पहुंच गया था, जो इस सीजन का अब तक का सबसे गर्म दिन रहा। आगे का अनुमान इस प्रकार है:
| तारीख |
अधिकतम तापमान |
न्यूनतम तापमान |
| 18 अप्रैल |
38-39 डिग्री |
22-25 डिग्री |
| 19 अप्रैल |
39-40 डिग्री |
23-24 डिग्री |
| 20 अप्रैल |
39-40 डिग्री |
23-26 डिग्री |
| 21-22 अप्रैल |
40 डिग्री के पार |
– |
IMD ने लोगों को सलाह दी है कि वे धूप में निकलने से बचें, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें और प्यास न लगने पर भी पानी पीते रहें। बच्चों और बुजुर्गों को खास तौर पर सावधानी बरतने को कहा गया है।
प्रदूषण का हाल और GRAP-1 के नियम
गर्मी के बीच दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण भी बढ़ गया है। 17 अप्रैल को दिल्ली का AQI 130 (Poor) दर्ज किया गया, जबकि नोएडा के सेक्टर-116 और ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-V में यह 300 के पार (Very Poor) पहुंच गया। इसे देखते हुए CAQM ने 16 अप्रैल से GRAP-I लागू कर दिया है।
- No PUC, No Fuel: बिना वैध PUC सर्टिफिकेट वाले वाहनों को पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं मिलेगा।
- धूल नियंत्रण: सड़कों पर मैकेनिकल स्वीपर और एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल किया जाएगा।
- निगरानी: ANPR कैमरों और डिजिटल सिस्टम से प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर नजर रखी जाएगी।
दिल्ली सरकार का एयर पॉल्यूशन एक्शन प्लान 2026
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 4 अप्रैल को प्रदूषण रोकने के लिए एक नया प्लान लॉन्च किया है। इसके तहत आने वाले समय में कई कड़े नियम लागू होंगे। 1 नवंबर से दिल्ली में केवल BS-VI, CNG या इलेक्ट्रिक गुड्स वाहनों को ही एंट्री मिलेगी। इसके अलावा शहर में 32,000 EV चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएंगे और इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। प्रदूषण ज्यादा बढ़ने पर ऑफिस के समय में बदलाव या वर्क-फ्रॉम-होम जैसे विकल्प भी दिए जा सकते हैं।