Delhi: दिल्ली और आसपास के इलाकों में भीषण गर्मी के बीच अब मौसम बदलने वाला है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 5 जून को दिल्ली-NCR में आंधी-तूफान और बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इस बदलाव से लोगों को तपती गर्मी
Delhi: दिल्ली और आसपास के इलाकों में भीषण गर्मी के बीच अब मौसम बदलने वाला है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 5 जून को दिल्ली-NCR में आंधी-तूफान और बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इस बदलाव से लोगों को तपती गर्मी से राहत मिलेगी, लेकिन तेज हवाओं के कारण सावधानी बरतने की जरूरत है।
5 और 6 जून को कैसा रहेगा मौसम?
मौसम विभाग के मुताबिक 5 जून को दिल्ली-NCR में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जो कुछ जगहों पर 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक भी पहुंच सकती हैं। इस दिन अधिकतम तापमान 36-38 डिग्री और न्यूनतम 23-25 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। वहीं 6 जून को भी गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है, हालांकि इसके लिए कोई विशेष चेतावनी नहीं दी गई है। इस दिन अधिकतम तापमान 36 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।
मौसम में बदलाव का क्या है कारण?
मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि यह बदलाव एक पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती परिसंचरण की वजह से हो रहा है। यह सिस्टम पाकिस्तान, हरियाणा और उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के ऊपर बना हुआ है। इसी कारण दिल्ली-NCR सहित इन राज्यों में बारिश और आंधी का माहौल बन रहा है। साथ ही दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने केरल में दस्तक दे दी है और आने वाले समय में इसकी गतिविधियों में तेजी आएगी।
सावधानी और जरूरी निर्देश
IMD ने चेतावनी दी है कि तेज हवाओं की वजह से पेड़ उखड़ सकते हैं और कमजोर ढांचों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे यातायात में भी दिक्कत आ सकती है। लोगों को सलाह दी गई है कि खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। इसके अलावा, जिन इलाकों में भारी बारिश हो रही है, वहां के किसानों को खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था करने को कहा गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
5 जून को दिल्ली में हवा की रफ्तार कितनी रहेगी?
IMD के अनुसार 5 जून को हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी, जबकि कुछ इलाकों में यह 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा तक जा सकती है।
मौसम में इस बदलाव की मुख्य वजह क्या है?
यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ और पाकिस्तान, हरियाणा व उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण हो रहा है।