Delhi: दिल्ली में 9 मई 2026 को आयोजित दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत में त्वरित न्याय की बड़ी मिसाल देखने को मिली। इस एक दिवसीय आयोजन में रिकॉर्ड 1.59 लाख से ज्यादा मामलों को सुलझाया गया। ट्रैफिक चालानों से लेकर करोड़ों रुपये
Delhi: दिल्ली में 9 मई 2026 को आयोजित दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत में त्वरित न्याय की बड़ी मिसाल देखने को मिली। इस एक दिवसीय आयोजन में रिकॉर्ड 1.59 लाख से ज्यादा मामलों को सुलझाया गया। ट्रैफिक चालानों से लेकर करोड़ों रुपये के वित्तीय विवादों तक, कुल 390.14 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक समझौते हुए, जिससे हजारों लोगों को बड़ी राहत मिली है।
लोक अदालत में किन मामलों का हुआ निपटारा और क्या थे नियम?
इस लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य विवादों को आपसी सहमति से जल्दी खत्म करना था। इसमें ट्रैफिक पुलिस के छोटे उल्लंघन जैसे हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट न लगाना, ओवरस्पीडिंग और गलत पार्किंग के मामलों को शामिल किया गया। हालांकि, शराब पीकर गाड़ी चलाने और हिट-एंड-रन जैसे गंभीर अपराधों को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया था। लोक अदालत द्वारा दिए गए फैसले अंतिम होते हैं और इनके खिलाफ किसी दूसरी अदालत में अपील नहीं की जा सकती।
ट्रैफिक चालान और वित्तीय समझौतों का पूरा हिसाब
दिल्ली में ट्रैफिक चालानों का बोझ बहुत ज्यादा था, जिसके चलते लोगों ने इस मौके का भरपूर फायदा उठाया। डिजिटल व्यवस्था के कारण अब चालान निपटारे की जानकारी सीधे मोबाइल पर SMS के जरिए मिल रही है।
| विवरण |
आंकड़े/जानकारी |
| कुल निपटाए गए मामले (Delhi) |
1,59,370 |
| कुल समझौता राशि (Delhi) |
390.14 करोड़ रुपये |
| निपटाए गए ट्रैफिक चालान |
1,31,241 |
| ट्रैफिक चालान से वसूली राशि |
2.07 करोड़ रुपये |
| DRT के 45 मामलों में समझौता |
212.33 करोड़ रुपये |
| सबसे पुराना मामला |
11 साल पुराना (2015 से लंबित) |
अधिकारियों ने इस डिजिटल पहल को कैसे देखा?
DSLSA के सदस्य सचिव राजीव बंसल ने इस डिजिटल लोक अदालत की तारीफ की और बताया कि अब SMS अलर्ट की स्थायी व्यवस्था हो गई है। NALSA के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि लोक अदालतें किफायती और सुलभ न्याय का प्रभावी माध्यम हैं। वहीं, वकील राजीव तोमर के मुताबिक दिल्ली में 2 करोड़ से ज्यादा लंबित ट्रैफिक चालान हैं, इसलिए लोग कम जुर्माने में निपटारे के लिए इन अदालतों का इंतजार करते हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लोक अदालत में किन ट्रैफिक चालानों का निपटारा किया गया?
इसमें हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट न लगाना, ओवरस्पीडिंग और गलत पार्किंग जैसे छोटे उल्लंघन शामिल थे। शराब पीकर गाड़ी चलाने और गंभीर सड़क हादसों के मामलों को इसमें शामिल नहीं किया गया था।
क्या लोक अदालत के फैसले को चुनौती दी जा सकती है?
नहीं, लोक अदालत द्वारा दिए गए निर्णय अंतिम और सभी पक्षों के लिए बाध्यकारी होते हैं। इनके खिलाफ किसी भी अन्य अदालत में अपील नहीं की जा सकती।