Delhi में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान 3 मजदूरों की मौत, फैक्ट्री मालिक समेत 3 गिरफ्तार

Delhi: राजधानी के मुंडका इलाके में एक फैक्ट्री के सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान तीन मजदूरों की जान चली गई. जहरीली गैस की वजह से अरुण, संदीप और चांद की मौत हुई. यह हादसा मैनुअल स्कैवेंजिंग यानी हाथ से मैला उठाने की समस्या

Delhi: राजधानी के मुंडका इलाके में एक फैक्ट्री के सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान तीन मजदूरों की जान चली गई. जहरीली गैस की वजह से अरुण, संदीप और चांद की मौत हुई. यह हादसा मैनुअल स्कैवेंजिंग यानी हाथ से मैला उठाने की समस्या और नियमों की अनदेखी को सामने लाता है.

घटना 26 जून 2026 की है, जब पश्चिमी दिल्ली के मुंडका औद्योगिक क्षेत्र में यह हादसा हुआ. पुलिस ने इस मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री मालिक सूरज मारवाह, ठेकेदार जयंत और नीरज को गिरफ्तार कर लिया है. मृतक मजदूर सुल्तानपुरी के इंदिरा झील इलाके के रहने वाले थे. मृतक अरुण के भाई नरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि उनके भाई को ज्यादा पैसों का लालच देकर टैंक के अंदर उतरने के लिए मजबूर किया गया था.

दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने 2 जुलाई को इस घटना पर दुख जताया और कहा कि कानून बनाना सरकार का काम है, लेकिन उन्हें लागू करना नागरिकों की भी जिम्मेदारी है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी. बाहरी जिले के डीसीपी विक्रम सिंह ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, मैनुअल स्कैवेंजिंग निषेध अधिनियम और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है.

सरकारी नियमों के मुताबिक, दिल्ली में अगस्त 2017 से मैनुअल स्कैवेंजिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है. साथ ही 2013 के कानून के तहत भी इस काम पर रोक है. उच्चतम न्यायालय ने भी इस मुद्दे पर सख्ती दिखाई है और मेट्रो शहरों को निर्देश दिया है कि ऐसी मौतों के परिजनों को चार हफ्ते के भीतर 30 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच महीनों में दिल्ली और अन्य शहरों में इस तरह की सफाई के दौरान 55 से ज्यादा कर्मचारियों की मौत हुई है.