Delhi और Mumbai में NEET पेपर लीक पर बवाल, छात्रों ने की शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

Delhi/Mumbai: NEET परीक्षा के पेपर लीक होने के बाद देश के युवाओं में भारी गुस्सा है। दिल्ली के जंतर मंतर से लेकर मुंबई की सड़कों तक छात्र अपना विरोध जता रहे हैं। इस आंदोलन के बीच 29 साल के हर्ष पटेल ने अपना अनुभव साझा कि

Delhi/Mumbai: NEET परीक्षा के पेपर लीक होने के बाद देश के युवाओं में भारी गुस्सा है। दिल्ली के जंतर मंतर से लेकर मुंबई की सड़कों तक छात्र अपना विरोध जता रहे हैं। इस आंदोलन के बीच 29 साल के हर्ष पटेल ने अपना अनुभव साझा किया है कि कैसे दिल्ली में उन्हें अपनी जान बचाकर भागना पड़ा, जबकि मुंबई में उन्हें उम्मीद की किरण दिखी।

यह पूरा विवाद 3 मई 2026 को हुई NEET परीक्षा से शुरू हुआ, जिसे बड़े पैमाने पर पेपर लीक और गड़बड़ियों के कारण 12 मई को रद्द कर दिया गया था। इसके बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम के एक युवा संगठन ने मोर्चा संभाला। उन्होंने 6 जून को जंतर मंतर पर पहला विरोध प्रदर्शन किया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। 20 जुलाई को जब प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़े, तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस और लाठियों का इस्तेमाल किया, जिसमें कई लोग घायल हुए।

मुंबई में भी इस आंदोलन का असर दिखा। 18 से 22 जुलाई के बीच शिवाजी पार्क, चैत्यभूमि और चेंबूर जैसे इलाकों में प्रदर्शन हुए। मुंबई पुलिस ने बिना अनुमति के विरोध प्रदर्शन करने के आरोप में करीब 400 लोगों पर केस दर्ज किया और 13 FIR लिखीं। इस पुलिस कार्रवाई के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट के 141 वकीलों ने भी आवाज उठाई और कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है।

सरकार की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि पेपर लीक के दोषियों को कड़ी सजा देने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। साथ ही, इस संबंध में एक सख्त बिल कैबिनेट में चर्चा के बाद अगले हफ्ते संसद में पेश किया जाएगा। हालांकि, CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने इसे केवल एक ‘बैंड-एड’ जैसा छोटा समाधान बताया है और कहा कि वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

प्रदर्शनों को रोकने के लिए दिल्ली प्रशासन ने कई कदम उठाए। 23 और 24 जुलाई को दिल्ली मेट्रो के 17 स्टेशनों की सेवाएं बंद कर दी गईं और सेंट्रल दिल्ली में मोबाइल इंटरनेट भी ठप कर दिया गया। इस बीच, लद्दाखी एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने सरकार के आश्वासन के बाद 24 जुलाई को अपना 26 दिनों का अनशन खत्म किया। महाराष्ट्र में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भी छात्रों के समर्थन में मौन आंदोलन किया और इसे समाज की पीड़ा बताया।