Delhi और Mumbai मर्डर केस के दो फरार भाई गिरफ्तार, 30 साल तक पुलिस को छकाया

Delhi: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए दो ऐसे भाइयों को गिरफ्तार किया है जो पिछले 30 सालों से कानून की आंखों में धूल झोंक रहे थे। फिरासत अली और शाह नवाज अली नाम के ये दोनों भाई 1996 में दि

Delhi: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए दो ऐसे भाइयों को गिरफ्तार किया है जो पिछले 30 सालों से कानून की आंखों में धूल झोंक रहे थे। फिरासत अली और शाह नवाज अली नाम के ये दोनों भाई 1996 में दिल्ली में हुए एक कत्ल के दोषी थे, लेकिन वे जमानत लेकर गायब हो गए थे। पुलिस ने इन्हें जुलाई 2026 में अलग-अलग राज्यों से ट्रैक कर पकड़ा है।

यह पूरा मामला 27 सितंबर 1996 से शुरू हुआ था जब दिल्ली के रघुबीर नगर में इश्तियाक अहमद नाम के एक कपड़े व्यापारी की हत्या कर दी गई थी। साल 2000 में कोर्ट ने शाह नवाज और फिरासत अली को इस मर्डर के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, अपील के दौरान उन्हें जमानत मिल गई और वे फरार हो गए। 2016 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी सजा बरकरार रखी, लेकिन दोनों भाई सरेंडर करने के बजाय और गहरे छिप गए।

जांच के दौरान पता चला कि फरार रहने के दौरान इन भाइयों ने अपराध का रास्ता नहीं छोड़ा। साल 2006 में मुंबई के भिंडी बाजार के पास एक इंसान का धड़ मिला था, जिसकी पहचान किशन खरवा के रूप में हुई। पुलिस के मुताबिक, फिरासत अली ने किशन की पत्नी बंसीबेन से 2 लाख रुपये लेकर यह कॉन्ट्रैक्ट किलिंग की थी। मर्डर इतना बेरहमी से किया गया था कि शरीर के बाकी हिस्से काट दिए गए थे ताकि पहचान न हो सके।

इन दोनों भाइयों ने पुलिस से बचने के लिए उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और झारखंड जैसे राज्यों में अपने ठिकाने बदले। वे वहां कपड़े व्यापारियों के रूप में काम करते थे ताकि किसी को शक न हो।

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की एंटी-रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल (ARSC) की टीम ने ACP संजय कुमार नगपाल की देखरेख और इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी के नेतृत्व में छापेमारी की। फिरासत अली को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से और शाह नवाज अली को झारखंड के गोड्डा से गिरफ्तार किया गया। अब दोनों को तिहाड़ जेल भेज दिया गया है और मुंबई पुलिस को भी फिरासत की गिरफ्तारी की सूचना दे दी गई है।