Delhi और Maharashtra: देश के दो बड़े शहरों मुंबई और दिल्ली-NCR में हवा की क्वालिटी फिलहाल चिंता का विषय बनी हुई है। 4 मई 2026 को दिल्ली में हवा की स्थिति काफी खराब रही, जबकि मुंबई में भी प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ देखा गया
Delhi और Maharashtra: देश के दो बड़े शहरों मुंबई और दिल्ली-NCR में हवा की क्वालिटी फिलहाल चिंता का विषय बनी हुई है। 4 मई 2026 को दिल्ली में हवा की स्थिति काफी खराब रही, जबकि मुंबई में भी प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ देखा गया। मौसम के बदलाव और निर्माण कार्यों की वजह से लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है।
दिल्ली-NCR में AQI की क्या स्थिति है?
दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अलग-अलग रिपोर्ट में अलग बताया गया है। AccuWeather ने इसे 196 ‘बहुत अस्वस्थ’ श्रेणी में रखा है, वहीं NDTV ने इसे 104 ‘खराब’ बताया। CPCB के मुताबिक पिछले 24 घंटों में औसत AQI 207 रहा, जबकि आनंद विहार जैसे इलाकों में यह 436 तक पहुँच गया जो ‘गंभीर’ स्तर है। IMD ने यहाँ धूल भरी आंधी और बारिश के लिए रेड और येलो अलर्ट जारी किया है।
मुंबई की हवा कितनी प्रदूषित है?
मुंबई का AQI 104 से 123 के बीच दर्ज किया गया है, जो ‘खराब’ से ‘अस्वस्थ’ श्रेणी में आता है। यहाँ PM10 और PM2.5 मुख्य प्रदूषक हैं। हालांकि, रेस्पायर लिविंग साइंसेज के सीईओ रोनक सुतारिया के मुताबिक 2026 की पहली तिमाही में हवा में सुधार हुआ है। मार्च में PM2.5 के स्तर में 21% की गिरावट आई, जिसका कारण समुद्री हवाएं और BMC द्वारा धूल कम करने के लिए किए गए उपाय हैं।
आम लोगों के स्वास्थ्य पर क्या असर होगा?
विशेषज्ञों का कहना है कि 100 से ऊपर AQI होने पर बच्चों और सांस की बीमारी वाले लोगों को बाहर कम निकलना चाहिए। मुंबई में सुबह 8 से 11 बजे के बीच प्रदूषण बढ़ता है, इसलिए ट्रैफिक और कंस्ट्रक्शन वाली जगहों से बचने की सलाह दी गई है। दिल्ली में भी संवेदनशील समूहों को बाहरी गतिविधियों को सीमित करने और सावधानी बरतने को कहा गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली में हवा की क्वालिटी सुधारने में क्या मदद मिल रही है?
दिल्ली में 4 मई को हुई छिटपुट बारिश और तेज हवाओं की वजह से गर्मी से राहत मिली और वायु गुणवत्ता में कुछ सुधार देखा गया। IMD के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ की वजह से बारिश जारी रहने की उम्मीद है।
मुंबई में प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण क्या हैं?
मुंबई में भारी ट्रैफिक जाम, रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स और बुनियादी ढांचे के विस्तार के कारण पार्टिकुलेट मैटर (PM) का स्तर बढ़ रहा है, जिससे हवा खराब हो रही है।