Delhi: दिल्ली की पूर्व केजरीवाल सरकार द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना को लेकर एक RTI में अहम जानकारी सामने आई है। इस खुलासे के मुताबिक, कोरोना काल के बाद से इस योजना का लाभ लेने वाले यात्रियों की संख्या
Delhi: दिल्ली की पूर्व केजरीवाल सरकार द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना को लेकर एक RTI में अहम जानकारी सामने आई है। इस खुलासे के मुताबिक, कोरोना काल के बाद से इस योजना का लाभ लेने वाले यात्रियों की संख्या में लगातार कमी देखी जा रही है। इसके साथ ही सरकार के पास इस योजना से जुड़े कई महत्वपूर्ण आंकड़े भी मौजूद नहीं हैं, जिससे योजना के रिकॉर्ड को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
क्या है मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना और कौन उठा सकता है इसका लाभ?
दिल्ली सरकार ने 5 दिसंबर 2018 को इस योजना की औपचारिक शुरुआत की थी। इस योजना के मुख्य नियम और पात्रता कुछ इस प्रकार हैं:
- योजना का लाभ दिल्ली के 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्ग नागरिक उठा सकते हैं।
- आवेदक का केंद्र या राज्य सरकार का कर्मचारी होना अनिवार्य नहीं है, यानी सरकारी कर्मचारी इसका लाभ नहीं ले सकते।
- 70 वर्ष से अधिक आयु के यात्री अपने साथ 18 वर्ष से अधिक उम्र का एक सहायक ले जा सकते हैं, जिसका खर्च सरकार उठाती है।
- पूरी यात्रा, भोजन, रहने की व्यवस्था और 2 लाख रुपये तक का बीमा दिल्ली सरकार मुफ्त देती है।
- आवेदन के लिए edistrict.delhigovt.nic.in पोर्टल या विधायक कार्यालय की मदद ली जा सकती है।
RTI रिपोर्ट में किन बातों का हुआ है खुलासा?
13 अप्रैल 2026 को सामने आई RTI के अनुसार, यात्रियों की संख्या में गिरावट का दौर कोरोना काल के बाद से शुरू हुआ था। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 2023 में जानकारी दी थी कि तब तक 73,000 से अधिक लोग इस योजना का लाभ ले चुके हैं, लेकिन ताज़ा आंकड़ों के अनुसार अब यात्रियों की रुचि कम होती दिख रही है।
| विवरण |
जानकारी |
| योजना की मंजूरी |
9 जुलाई 2018 |
| RTI खुलासे की तारीख |
13 अप्रैल 2026 |
| प्रमुख विभाग |
राजस्व विभाग, दिल्ली तीर्थ यात्रा विकास समिति |
| सहयोगी संस्था |
IRCTC (विशेष ट्रेनों के लिए) |
| प्रमुख तीर्थ स्थल |
अयोध्या सहित कई अन्य धार्मिक स्थल |
RTI के खुलासे से यह भी पता चला है कि राजस्व विभाग के पास यात्रियों की संख्या और यात्रा से जुड़े कई डेटा पॉइंट्स गायब हैं। शुरुआत में इस योजना में पांच तीर्थ यात्रा मार्ग तय किए गए थे, जिसमें बाद में अयोध्या को भी जोड़ा गया था ताकि अधिक से अधिक बुजुर्गों को धार्मिक यात्रा कराई जा सके।