Delhi में मानसून की एंट्री के बाद भी गर्मी का कहर, IMD ने जारी किया Yellow Alert, प्रदूषण पर सरकार सख्त
Delhi: राजधानी दिल्ली में इस बार मानसून ने अपनी रफ्तार धीमी रखी है। 2 जुलाई को मानसून के आने के बाद भी शहर में वैसी बारिश नहीं हुई जैसी उम्मीद थी, जिसकी वजह से लोग उमस और भीषण गर्मी से परेशान हैं। मौसम विभाग (IMD) ने अब
Delhi: राजधानी दिल्ली में इस बार मानसून ने अपनी रफ्तार धीमी रखी है। 2 जुलाई को मानसून के आने के बाद भी शहर में वैसी बारिश नहीं हुई जैसी उम्मीद थी, जिसकी वजह से लोग उमस और भीषण गर्मी से परेशान हैं। मौसम विभाग (IMD) ने अब दिल्ली और आसपास के इलाकों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है।
इस साल दिल्ली में मानसून अपनी तय तारीख से पांच दिन की देरी से आया। 2 जुलाई को जब मानसून पहुंचा, तब नोएडा और गाजियाबाद समेत दिल्ली के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश हुई थी, जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन उसके बाद बारिश का सिलसिला टूट गया। 7 जुलाई को बारिश की संभावना 41 से 51 प्रतिशत बताई गई है और रात में हल्की बारिश के साथ गरज-चमक होने का अनुमान है। IMD के मुताबिक, 7 से 11 जुलाई के बीच बारिश की गतिविधि बढ़ सकती है, जिससे शहर को गर्मी से असली निजात मिलने की उम्मीद है।
बारिश की कमी के कारण हवा में नमी यानी ह्यूमिडिटी काफी बढ़ गई है, जो 61 प्रतिशत से 95 प्रतिशत के बीच रही है। वहीं, हवा की क्वालिटी की बात करें तो 7 जुलाई को दिल्ली और गुरुग्राम का AQI 105 दर्ज किया गया, जिसे ‘खराब’ श्रेणी में रखा गया है। PM10 इस समय मुख्य प्रदूषक बना हुआ है।
प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने एक स्थायी विंटर पॉल्यूशन मास्टर प्लान तैयार किया है, जो हर साल 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहेगा। इस प्लान के तहत कई कड़े नियम बनाए गए हैं:
- गाड़ियों को ईंधन तभी मिलेगा जब उनके पास वैध PUC सर्टिफिकेट होगा।
- 1 नवंबर से 31 जनवरी तक BS-VI मानक से कम वाली बाहरी गाड़ियों के प्रवेश पर रोक रहेगी।
- प्रदूषण बढ़ने पर सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों में 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य होगा।
- निर्माण कार्यों और मलबे से धूल उड़ाने वाली गतिविधियों पर सख्त पाबंदी रहेगी।
- 3,000 वर्ग मीटर से बड़े कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में एंटी-स्मॉग गन लगाना जरूरी होगा।
इसके अलावा CAQM ने भी NCR में सख्ती बढ़ा दी है। जून के आखिर में हुई जांच में 62 उल्लंघन मिले हैं, जिनमें औद्योगिक इकाइयों और डीजल जनरेटर सेट से जुड़े नियम तोड़ने के मामले शामिल हैं। सरकार ने साफ किया है कि 1 अक्टूबर 2026 से पेट्रोल पंपों पर ट्रैकिंग कैमरे लगाए जाएंगे और बिना PUC के गाड़ियों को तेल नहीं दिया जाएगा। साथ ही, 31 दिसंबर 2026 तक पूरे NCR से डीजल ऑटो-रिक्शा को पूरी तरह हटाने का लक्ष्य रखा गया है।