Delhi में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच मोबाइल इंटरनेट बंद, NEET पेपर लीक और बेरोजगारी को लेकर बवाल
Delhi: राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में 20 जुलाई 2026 को मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अचानक बंद कर दी गईं। यह कदम तब उठाया गया जब Cockroach Janta Party (CJP) के नेतृत्व में हजारों छात्र NEET पेपर लीक, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के
Delhi: राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में 20 जुलाई 2026 को मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अचानक बंद कर दी गईं। यह कदम तब उठाया गया जब Cockroach Janta Party (CJP) के नेतृत्व में हजारों छात्र NEET पेपर लीक, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘चलो संसद’ मार्च निकाल रहे थे। इंटरनेट सेवाएं उसी दिन शाम करीब 6 बजे दोबारा शुरू हुईं, लेकिन प्रदर्शन का असर अगले कई दिनों तक जंतर मंतर पर देखा गया।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों का व्यवहार हिंसक था और उन्होंने पुलिसकर्मियों पर पथराव किया और गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया। पुलिस अब उन चैट मैसेज की जांच कर रही है जिनमें इंटरनेट बंद होने की स्थिति में ब्लूटूथ ऐप्स का इस्तेमाल करने और आंदोलन के लिए बलिदान देने की बातें कही गई थीं। दूसरी तरफ, CJP के संस्थापक अभिजीत डिपके ने हिंसा के आरोपों को नकारा और कहा कि पुलिस ने बिना उकसावे के बल प्रयोग किया और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी की।
इस पूरे मामले में डिजिटल अधिकारों की बात करने वाले संगठन Internet Freedom Foundation (IFF) ने सरकार की आलोचना की है। उनका कहना है कि इंटरनेट बंद करने का आदेश सार्वजनिक नहीं किया गया, जो सुप्रीम कोर्ट के नियमों का उल्लंघन है। वहीं, Human Rights Watch ने 23 जुलाई को एक बयान जारी कर सुरक्षा बलों द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर किए गए बल प्रयोग की निंदा की और निष्पक्ष जांच की मांग की।
राजनीतिक माहौल भी गरमाया रहा और राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे विपक्षी नेताओं ने सरकार के इस रवैये पर सवाल उठाए। राहुल गांधी खुद प्रदर्शनकारियों के समर्थन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास तक पहुंचे। इस हंगामे के बीच एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से जबरन हटाया गया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जिससे छात्रों का गुस्सा और बढ़ गया। सुरक्षा कारणों से 23 जुलाई तक दिल्ली मेट्रो के 16 स्टेशन बंद रहे और एक ACP समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए।