Delhi: दिल्ली मेट्रो की मजेंटा लाइन अब और भी लंबी होने वाली है. दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने इसके विस्तार के लिए 90 नए कोच खरीदने की तैयारी शुरू कर दी है. ये कोच इंदरलोक-इंद्रप्रस्थ कॉरिडोर पर चलने वाली 15 ट्रे
Delhi: दिल्ली मेट्रो की मजेंटा लाइन अब और भी लंबी होने वाली है. दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने इसके विस्तार के लिए 90 नए कोच खरीदने की तैयारी शुरू कर दी है. ये कोच इंदरलोक-इंद्रप्रस्थ कॉरिडोर पर चलने वाली 15 ट्रेनों के लिए होंगे. इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद मजेंटा लाइन की लंबाई करीब 89 किलोमीटर हो जाएगी, जो इसे दिल्ली मेट्रो का सबसे लंबा कॉरिडोर बना देगी. इस विस्तार के बाद नोएडा और दिल्ली के बीच सफर करने वाले यात्रियों को काफी सुविधा होगी.
नई ट्रेनों की खरीद और टेंडर की जानकारी क्या है?
DMRC ने मजेंटा लाइन के विस्तार के लिए 90 नए कोचों के डिजाइन, निर्माण और सप्लाई के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं. इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 204 हफ्तों का समय तय किया गया है. खास बात यह है कि जो कंपनी इन कोचों की सप्लाई करेगी, वही अगले 35 सालों तक इनके रखरखाव की भी जिम्मेदारी संभालेगी. इस पूरी खरीद के लिए जापान इंटरनेशनल कोआपरेशन एजेंसी (JICA) और भारत सरकार के बीच हुए ऋण समझौते के जरिए फंड जुटाया जाएगा.
- प्री-बिड मीटिंग: 5 मई, 2026 को सुबह 11 बजे होगी
- तकनीकी बोली: 1 जुलाई, 2026 को दोपहर 3:05 बजे खोली जाएगी
- ट्रेनों की संख्या: कुल 15 नई छह-कोच वाली ट्रेनें शामिल होंगी
यात्रियों को इस विस्तार से क्या फायदे होंगे?
मजेंटा लाइन का विस्तार होने के बाद यह कॉरिडोर शहर के कई बड़े हिस्सों को सीधे जोड़ेगा. अभी इस लाइन पर केवल चार इंटरचेंज स्टेशन हैं, लेकिन विस्तार के बाद इनकी संख्या बढ़कर 21 हो जाएगी. इससे यात्रियों को एक लाइन से दूसरी लाइन पर जाने में बहुत आसानी होगी. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आजादपुर, नई दिल्ली, इंदरलोक और सेंट्रल सचिवालय जैसे स्टेशन ट्रिपल इंटरचेंज के रूप में काम करेंगे, जहां से तीन अलग-अलग रूट के लिए मेट्रो बदली जा सकेगी.
| विशेषता |
विवरण |
| कुल लंबाई |
89 किलोमीटर (विस्तार के बाद) |
| नई ट्रेनें |
15 (छह-कोच वाली) |
| इंटरचेंज स्टेशन |
21 स्टेशन |
| तकनीक |
पूरी तरह चालक रहित (Driverless) |
यह पूरा खंड तैयार होने के बाद चालक रहित कॉरिडोर के रूप में काम करेगा. इससे न केवल मेट्रो की फ्रीक्वेंसी बेहतर होगी बल्कि यात्रियों को कम समय में लंबी दूरी तय करने में मदद मिलेगी. DMRC का लक्ष्य इस विस्तार के जरिए दिल्ली-एनसीआर की ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना है.