Delhi: दिल्ली में अपना आशियाना बनाने का सपना देख रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार ने दिल्ली में ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) के नियमों में बड़ी ढील दी है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने मंगलवार, 7 अप्
Delhi: दिल्ली में अपना आशियाना बनाने का सपना देख रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार ने दिल्ली में ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) के नियमों में बड़ी ढील दी है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने मंगलवार, 7 अप्रैल 2026 को इसके लिए नए नियमों और चार्जेस का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। सरकार के इस कदम से दिल्ली में किफायती घरों की संख्या बढ़ेगी और मेट्रो कॉरिडोर के आसपास की जमीन का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा।
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नए नियमों से आम आदमी को क्या फायदा होगा?
सरकार ने इस नीति में सबसे बड़ा बदलाव प्लॉट के साइज को लेकर किया है। पहले TOD प्रोजेक्ट के लिए कम से कम 10,000 वर्ग मीटर जमीन की जरूरत होती थी, लेकिन अब इसे घटाकर सिर्फ 2,000 वर्ग मीटर कर दिया गया है। इससे अब छोटे बिल्डर भी मेट्रो स्टेशनों के पास हाउसिंग प्रोजेक्ट शुरू कर सकेंगे। इसके अलावा, अब कम घनत्व वाले इलाकों और अनधिकृत कॉलोनियों को भी इस दायरे में लाया गया है, बशर्ते वहां की सड़क कम से कम 18 मीटर चौड़ी हो। इससे मध्यम वर्ग के लिए दिल्ली के मुख्य इलाकों में घर लेना संभव हो पाएगा।
क्या हैं नए कंस्ट्रक्शन नियम और चार्जेस?
पूरी दिल्ली के लिए अब एक समान TOD चार्ज तय किया गया है, जिससे भ्रम की स्थिति खत्म होगी। इसके अलावा निर्माण क्षमता यानी Floor Area Ratio (FAR) को भी बढ़ाया गया है ताकि एक ही जमीन पर ज्यादा घर बनाए जा सकें। नए नियमों के मुख्य बिंदु नीचे दी गई तालिका में देख सकते हैं:
| नियम या सुविधा |
नया मानक (2026) |
| न्यूनतम प्लॉट साइज |
2,000 वर्ग मीटर |
| नया TOD चार्ज |
10,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर |
| परमिसेबल FAR |
400 (अधिकतम 500 तक संभव) |
| किफायती घर आरक्षण |
कुल FAR का कम से कम 65% हिस्सा (100 sqm तक के यूनिट) |
| कमर्शियल उपयोग |
न्यूनतम 10% आरक्षण |
मेट्रो और RRTS स्टेशनों के पास कैसे बदल जाएगी तस्वीर?
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि इस नीति से दिल्ली में जमीन का सही उपयोग होगा और लोगों को ऑफिस के पास ही रहने की सुविधा मिलेगी। अब मेट्रो, रेलवे स्टेशन और Namo Bharat स्टेशनों के 500 मीटर के दायरे में सघन विकास हो सकेगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, इससे शहर के करीब 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से नए फ्लैट्स बन पाएंगे। प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने के लिए DDA के वाइस-चेयरमैन के तहत एक विशेष कमेटी बनाई गई है, जो सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए समय पर मंजूरी देगी।