Delhi दवा घोटाला: 2 और अधिकारियों पर FIR, CM रेखा गुप्ता के आदेश के बाद ACB की कार्रवाई तेज
Delhi: दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में दवाओं और मेडिकल उपकरणों की खरीद में हुए बड़े घोटाले की जांच अब और तेज हो गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के कड़े रुख के बाद एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) ने दो और वरिष्ठ अधिकारियों के खिला
Delhi: दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में दवाओं और मेडिकल उपकरणों की खरीद में हुए बड़े घोटाले की जांच अब और तेज हो गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के कड़े रुख के बाद एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) ने दो और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार और सरकारी पैसों की हेराफेरी के गंभीर आरोप लगे हैं।
ताजा जानकारी के मुताबिक, ACB ने तत्कालीन महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (DGHS) डॉ. वत्सला अग्रवाल और डिप्टी कंट्रोलर अकाउंट्स नीरज चोपड़ा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 23 जून को इन अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे, जिसके बाद 24 जून को यह कार्रवाई हुई। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी नीति जीरो टॉलरेंस की है और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह पूरा घोटाला लगभग 650 करोड़ रुपये से ज्यादा का बताया जा रहा है। इसमें सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के जरिए दवाओं और सर्जिकल सामान की खरीद में गड़बड़ी की गई। आरोप है कि टेंडर की शर्तों को बदला गया और कुछ खास कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बढ़ी हुई कीमतों पर सामान खरीदा गया। इस मामले में CPA के पूर्व प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जिन्हें 19 जून को पुलिस रिमांड पर भेजा गया था।
| अधिकारी का नाम | पद/भूमिका | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|
| डॉ. विनोद कुमार रंगा | पूर्व प्रमुख, CPA | गिरफ्तार और निलंबित |
| डॉ. वत्सला अग्रवाल | पूर्व प्रमुख, CPA एवं DGHS | FIR दर्ज और निलंबित |
| नीरज चोपड़ा | उप नियंत्रक लेखा | FIR दर्ज और निलंबित |
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई जरूरी खरीद फाइलें गायब हैं, जिन्हें खोजने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक सुधार करते हुए तिहाड़ और मंडोली जेलों में 5 साल से ज्यादा समय से तैनात 39 डॉक्टरों के तबादले की सिफारिश की है। सरकार का मानना है कि एक ही जगह लंबे समय तक रहने से भ्रष्टाचार और मनमानी बढ़ती है। यह पूरी जांच भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत की जा रही है।