Delhi में दवाओं की किल्लत का बड़ा घोटाला, पूर्व DGHS समेत कई बड़े अफसर गिरफ्तार, 600 करोड़ की गड़बड़ी का आरोप

Delhi: राजधानी के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और सप्लायरों ने मिलकर करोड़ों रुपये का खेल खेला, जिसमें जानबूझकर दवाओं की किल्लत

Delhi: राजधानी के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और सप्लायरों ने मिलकर करोड़ों रुपये का खेल खेला, जिसमें जानबूझकर दवाओं की किल्लत पैदा की गई ताकि बाद में महंगे दामों पर खरीदारी की जा सके। Anti-Corruption Branch (ACB) की जांच में इस बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है।

इस मामले में ACB ने कड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व Director General of Health Services (DGHS) डॉ. वत्सला अग्रवाल, Central Procurement Agency (CPA) के पूर्व ऑफिस हेड डॉ. विजय कुमार रंगा और पूर्व डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन अधिकारियों और सप्लायरों के गठजोड़ ने मिलकर 600 करोड़ रुपये से ज्यादा की हेराफेरी की। जांच में सामने आया कि जरूरी दवाओं और मेडिकल सामानों की कीमतें बाजार रेट से कई गुना ज्यादा बढ़ाकर तय की गईं।

घोटाले को अंजाम देने के लिए ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल को दरकिनार कर मैनुअल वर्क ऑर्डर जारी किए गए। सरकारी पोर्टल पर टेंडर को ‘प्रोसेस’ में दिखाया जाता रहा, जबकि असल में पसंदीदा सप्लायरों को भुगतान किया जा चुका था। CPA ने जानबूझकर राज्य स्तरीय टेंडरों में देरी की, जिससे अस्पतालों में दवाओं की कमी हुई। इसके बाद ‘इमरजेंसी’ का बहाना बनाकर लोकल केमिस्टों से 70 से 80 प्रतिशत ज्यादा दाम पर दवाएं खरीदी गईं।

नाम/पद कार्रवाई तारीख (2026)
डॉ. विजय कुमार रंगा (पूर्व हेड, CPA) गिरफ्तार 18 जून
डॉ. वत्सला अग्रवाल (पूर्व DGHS) गिरफ्तार 27-28 जून
नीरज चोपड़ा (पूर्व डिप्टी कंट्रोलर) गिरफ्तार 29-30 जून
74 डॉक्टर तबादला 30 जून
DGHS डेटा असिस्टेंट बर्खास्त 30 जून
दो जूनियर असिस्टेंट सस्पेंड 30 जून

इस पूरे खेल का मुख्य आरोपी सप्लायर राजीव रंगिला बताया जा रहा है, जिसने फर्जी कंपनियां बनाकर रेट तय किए और कमीशन लिया। वह फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है। जांच में यह भी पता चला है कि अस्पतालों के लिए बेडशीट 150 रुपये के बजाय 450 रुपये में खरीदी गई, जिसमें एक ही परिवार की तीन कंपनियां शामिल थीं।

इस घोटाले को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने 6-7 जुलाई को दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और इसे 650 करोड़ का घोटाला बताया। वहीं बीजेपी ने कहा कि डॉ. वत्सला अग्रवाल AAP सरकार के समय अहम पद पर थीं, जिससे उनकी मिलीभगत साफ दिखती है।