Delhi में 700 करोड़ का दवा घोटाला, मुख्य आरोपी राजीव रंगीला के खिलाफ LOC जारी, उत्तराखंड तक छापेमारी
Delhi: दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने दवाओं और मेडिकल उपकरणों की खरीद में हुए करीब 650 से 700 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले पर शिकंजा कसा है। इस मामले के मुख्य आरोपी दवा कारोबारी राजीव रंगीला की तलाश में एसीबी
Delhi: दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने दवाओं और मेडिकल उपकरणों की खरीद में हुए करीब 650 से 700 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले पर शिकंजा कसा है। इस मामले के मुख्य आरोपी दवा कारोबारी राजीव रंगीला की तलाश में एसीबी ने दिल्ली-एनसीआर और उत्तराखंड में उसके कई ठिकानों पर दबिश दी है। आरोपी के फरार होने के कारण उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी कर दिया गया है ताकि वह देश छोड़कर न भाग सके।
जांच अधिकारियों के मुताबिक राजीव रंगीला पिछले एक दशक से दिल्ली और उत्तराखंड में दवाओं की सप्लाई के नेटवर्क को चला रहा था। आरोप है कि उसने कई फर्जी कंपनियां बनाईं और सरकारी निविदाओं (Tenders) में हेरफेर करके खुद को फायदा पहुंचाया। संयुक्त एसीबी विक्रमजीत सिंह ने बताया कि कुछ सरकारी कर्मचारियों ने मिलकर टेंडर की शर्तों और तकनीकी नियमों को बदला ताकि चुनिंदा फर्मों को फायदा मिल सके। जांच में यह भी सामने आया कि जिन टेंडरों में राजीव रंगीला शामिल था, उनके भुगतान बहुत जल्दी कर दिए गए, जबकि अन्य सप्लायरों का पैसा अटका रहा।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी जांच शुरू कर दी है। ED अब ‘रंगीला ब्रदर्स’ यानी राजीव अरोड़ा उर्फ राजीव रंगीला, संदीप अरोड़ा और राहुल अरोड़ा के बैंक खातों और उनकी संपत्तियों की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि घोटाले के पैसे का इस्तेमाल कहां किया गया।
इस पूरे मामले में कुछ बड़े अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। एसीबी ने पूर्व स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (DGHS) डॉ. वत्सला अग्रवाल, लेखा उप नियंत्रक नीरज चोपड़ा और सीपीए कार्यालय के पूर्व प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। इस घोटाले में एफ मेड डिवाइसेज, टेक्नोक्रेट्स, राज श्री, आशी सर्जिकल एंड फार्मास्युटिकल्स और एम साहिब एंड संस जैसी फर्जी कंपनियों के नाम सामने आए हैं। फिलहाल राजीव रंगीला लापता है और चर्चा है कि वह जर्मनी भाग गया है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।