Delhi: दिल्ली मेडिकल काउंसिल (DMC) में वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों का बड़ा मामला सामने आया है। निदेशालय ऑफ ऑडिट ने 1 दिसंबर 2019 से 10 फरवरी 2025 तक के कार्यकाल की स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभा
Delhi: दिल्ली मेडिकल काउंसिल (DMC) में वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों का बड़ा मामला सामने आया है। निदेशालय ऑफ ऑडिट ने 1 दिसंबर 2019 से 10 फरवरी 2025 तक के कार्यकाल की स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में करोड़ों रुपये की हेराफेरी और नियमों की अनदेखी का जिक्र है।
ऑडिट रिपोर्ट में किन गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है?
रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व रजिस्ट्रार Dr. Girish Tyagi ने रिटायरमेंट की उम्र 60 साल होने के बाद भी 65 साल तक पद संभाला, जो सरकारी नियमों के खिलाफ था। इसके अलावा, बिना मंजूरी के खर्च करना, सरकारी वित्तीय नियमों का पालन न करना और रिकॉर्ड का सही रखरखाव न करना जैसी गंभीर खामियां पाई गई हैं। इस्तीफे के समय जरूरी तीन महीने का नोटिस पीरियड न देना भी नियमों का उल्लंघन माना गया है।
कितने रुपयों की वसूली की सिफारिश की गई है?
ऑडिट टीम ने सरकारी खजाने को हुए नुकसान और गलत तरीके से लिए गए पैसों की रिकवरी की बात कही है। विवरण नीचे दी गई टेबल में है:
| विवरण |
रकम (अनुमानित) |
| रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल फीस में कमी से सरकारी नुकसान |
₹5.57 करोड़ से ज्यादा |
| गलत तरीके से लिए गए वेतन और भत्ते की वसूली |
₹3.23 करोड़ से ज्यादा |
| अन्य अनियमितताएं (स्टाफ नियमितीकरण और महंगे गिफ्ट) |
₹1.24 करोड़ से ज्यादा |
सरकार और पूर्व रजिस्ट्रार का क्या कहना है?
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री Pankaj Kumar Singh ने कहा कि भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी और रिपोर्ट की समीक्षा के बाद सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि DMC का पुनर्गठन जल्द ही चुनाव के जरिए किया जाएगा। वहीं, पूर्व रजिस्ट्रार Dr. Girish Tyagi का कहना है कि उन्होंने अभी रिपोर्ट नहीं पढ़ी है और वे कानूनी रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने अपने पद खाली करने के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में केस भी किया हुआ है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली मेडिकल काउंसिल (DMC) को क्यों भंग किया गया था?
एलजी वी.के. सक्सेना ने 17 जून 2025 को प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के कारण DMC को भंग कर दिया था।
ऑडिट रिपोर्ट में पूर्व रजिस्ट्रार पर क्या आरोप हैं?
पूर्व रजिस्ट्रार पर रिटायरमेंट के बाद भी पद पर बने रहने, बिना मंजूरी खर्च करने और रजिस्ट्रेशन फीस में कमी कर सरकारी खजाने को करीब 5.57 करोड़ रुपये का नुकसान पहुँचाने का आरोप है।