Delhi: दिल्ली मेडिकल काउंसिल (DMC) में वित्तीय गड़बड़ियों का एक बड़ा मामला सामने आया है। एक स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट में साल 2019 से 2025 के बीच करोड़ों रुपये के नुकसान और नियमों की अनदेखी का खुलासा हुआ है। यह रिपोर्ट अब दिल्
Delhi: दिल्ली मेडिकल काउंसिल (DMC) में वित्तीय गड़बड़ियों का एक बड़ा मामला सामने आया है। एक स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट में साल 2019 से 2025 के बीच करोड़ों रुपये के नुकसान और नियमों की अनदेखी का खुलासा हुआ है। यह रिपोर्ट अब दिल्ली सरकार को सौंप दी गई है, जिसमें पूर्व रजिस्ट्रार और कुछ अन्य अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
ऑडिट रिपोर्ट में क्या-क्या गड़बड़ियां पाई गईं
रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2019 से फरवरी 2025 के दौरान DMC में भारी प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताएं हुईं। सरकारी खजाने को कुल 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान होने का अनुमान है। इसमें डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल फीस में कमी करने की वजह से 5.57 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसके अलावा, बिना मंजूरी के खर्च करना और रिकॉर्ड का सही रखरखाव न करना भी पाया गया है।
| विवरण |
अनुमानित राशि / उल्लंघन |
| कुल अनुमानित नुकसान |
10 करोड़ रुपये से अधिक |
| रजिस्ट्रेशन फीस में नुकसान |
5.57 करोड़ रुपये से अधिक |
| वेतन और भत्तों की वसूली |
3.23 करोड़ रुपये से अधिक |
| अन्य अनियमित खर्च (उपहार आदि) |
1.24 करोड़ रुपये से अधिक |
| नोटिस अवधि न मानने पर वसूली |
13 लाख रुपये |
किन लोगों पर लगे आरोप और क्या है उनका पक्ष
इस पूरे मामले में तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. गिरीश त्यागी को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है। रिपोर्ट में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अरुण गुप्ता और पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. नरेश चावला पर भी डॉ. त्यागी का कार्यकाल गलत तरीके से बढ़ाने का आरोप है। नियमों के मुताबिक रजिस्ट्रार की उम्र 60 साल होनी चाहिए थी, जिसे बढ़ाकर 65 साल कर दिया गया, जो दिल्ली सरकार के आदेशों के खिलाफ था।
दूसरी तरफ, डॉ. गिरीश त्यागी ने इन सभी आरोपों को गलत और भ्रामक बताया है। उनका कहना है कि उनका कार्यकाल 25 सदस्यों वाली काउंसिल ने मंजूर किया था और यह मामला अभी कोर्ट में है। वहीं, दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने साफ कहा है कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएगी और जांच के बाद सख्त कार्रवाई होगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
DMC घोटाले में कुल कितना नुकसान हुआ है
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार सरकारी खजाने को कुल 10 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है, जिसमें रजिस्ट्रेशन फीस में कमी के कारण 5.57 करोड़ रुपये का नुकसान शामिल है।
पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. गिरीश त्यागी से कितनी वसूली की सिफारिश की गई है
रिपोर्ट में डॉ. त्यागी से वेतन, भत्तों और अन्य खर्चों के रूप में 3.23 करोड़ रुपये और नोटिस अवधि का पालन न करने पर 13 लाख रुपये की वसूली की सिफारिश की गई है।