Delhi: दिल्ली नगर निगम (MCD) शहर के कचरे के निपटारे के लिए Tehkhand waste-to-energy प्लांट की क्षमता बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इस विस्तार से न केवल शहर के लैंडफिल साइट्स का बोझ कम होगा, बल्कि बिजली और बायोगैस का उत्पाद
Delhi: दिल्ली नगर निगम (MCD) शहर के कचरे के निपटारे के लिए Tehkhand waste-to-energy प्लांट की क्षमता बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इस विस्तार से न केवल शहर के लैंडफिल साइट्स का बोझ कम होगा, बल्कि बिजली और बायोगैस का उत्पादन भी बढ़ेगा। MCD अब इसके लिए जरूरी सरकारी मंजूरियां लेने की कोशिश में जुटा है।
प्लांट की क्षमता में क्या बदलाव आएंगे?
Tehkhand प्लांट में होने वाले विस्तार से कचरा निस्तारण और बिजली उत्पादन की क्षमता काफी बढ़ जाएगी। इसकी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
| विवरण |
वर्तमान स्थिति |
विस्तार के बाद |
| कचरा प्रोसेसिंग क्षमता |
2,000 मीट्रिक टन/दिन |
3,000 मीट्रिक टन/दिन |
| बिजली उत्पादन |
25 MW |
45 MW |
| बायोगैस उत्पादन |
– |
20,000 क्यूबिक मीटर/दिन |
| Bio-CNG उत्पादन |
– |
लगभग 8 टन/दिन |
प्रोजेक्ट का बजट और समय सीमा क्या है?
इस पूरे विस्तार प्रोजेक्ट पर कुल 900 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसमें से 435 करोड़ रुपये नई क्षमता जोड़ने के लिए रखे गए हैं। अच्छी बात यह है कि इसके लिए किसी नई जमीन की जरूरत नहीं पड़ेगी, सारा काम मौजूदा परिसर में ही होगा। MCD का लक्ष्य है कि दिसंबर 2027 तक इस प्लांट के सभी अपग्रेडेशन का काम पूरा कर लिया जाए।
मंजूरी और नियमों की क्या स्थिति है?
इस प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC) की Expert Appraisal Committee से मंजूरी मिलना जरूरी है। DPCC ने इस संबंध में पब्लिक कंसल्टेशन भी पूरा कर लिया है। वहीं, National Green Tribunal (NGT) ने CPCB को नए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2026 के हिसाब से गाइडलाइंस जारी करने को कहा है। CPCB की एक रिपोर्ट में प्लांट के लीचेट ट्रीटमेंट सिस्टम में क्लोरीन के स्तर को लेकर कुछ कमियां भी पाई गई थीं, जिन्हें ठीक करना होगा।