Delhi में अब आवारा कुत्तों की होगी माइक्रोचिपिंग, MCD ने शुरू किया पायलट प्रोजेक्ट

Delhi: राजधानी दिल्ली में आवारा कुत्तों की आबादी को कंट्रोल करने के लिए MCD ने एक नई तकनीक का सहारा लिया है। शुक्रवार, 4 जुलाई 2026 को बिजवासन स्थित एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर में माइक्रोचिपिंग का पायलट प्रोजेक्ट शुर

Delhi: राजधानी दिल्ली में आवारा कुत्तों की आबादी को कंट्रोल करने के लिए MCD ने एक नई तकनीक का सहारा लिया है। शुक्रवार, 4 जुलाई 2026 को बिजवासन स्थित एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर में माइक्रोचिपिंग का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया। इस कदम से अब कुत्तों के टीकाकरण और नसबंदी का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल तरीके से रखा जा सकेगा।

MCD ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि वह शहर में आवारा कुत्तों की संख्या कम करने के लिए जरूरी कदम उठा रही है। इस प्रोजेक्ट के तहत कुत्तों के शरीर में चावल के दाने के बराबर एक छोटी सी ISO-सर्टिफाइड माइक्रोचिप लगाई जाएगी। इस चिप में 15 अंकों का एक यूनिक आईडी नंबर होगा, जिससे कुत्ते की पहचान, उसकी लोकेशन और वैक्सीनेशन की जानकारी आसानी से मिल सकेगी।

यह पूरी प्रक्रिया Friendicoes-SESCA संस्था द्वारा CSR मॉडल के तहत मुफ्त में की जा रही है। प्रोजेक्ट का खर्च BRPL और BYPL जैसी बिजली वितरण कंपनियों ने उठाया है। अधिकारियों के मुताबिक, बिजवासन सेंटर पर हर महीने करीब 600 कुत्तों की नसबंदी होती है, जिन्हें अब वैक्सीन और माइक्रोचिप भी दी जाएगी। जल्द ही इस मुहिम को गाजीपुर ABC सेंटर तक भी बढ़ाया जाएगा, जिससे हर महीने 2,000 से 2,500 कुत्तों को कवर किया जा सकेगा।

MCD का लक्ष्य इस साल के अंत तक दिल्ली के सभी वयस्क आवारा कुत्तों की माइक्रोचिपिंग पूरी करना है। तीन महीने से कम उम्र के पिल्लों को अगले चरण में कवर किया जाएगा। इस सिस्टम से यह भी पता चलेगा कि जिन कुत्तों की नसबंदी हो चुकी है, वे दोबारा ब्रीडिंग तो नहीं कर रहे हैं। अगर किसी NGO की लापरवाही सामने आई, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरी योजना के लिए MCD ने बजट का भी इंतजाम किया है। जनवरी 2026 में करीब 35 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था, जिसमें से 20 करोड़ रुपये निगम और 15 करोड़ रुपये NGO पार्टनरशिप के जरिए खर्च किए जाने थे। एक माइक्रोचिप की कीमत करीब 200 से 300 रुपये के बीच है। यह सारा डेटा एक सेंट्रलाइज्ड डैशबोर्ड पर अपलोड होगा, जिससे डॉग बाइट या बीमारी फैलने की स्थिति में तुरंत एक्शन लिया जा सकेगा।