Delhi में MCD करेगा प्रॉपर्टी टैक्स और ट्रेड लाइसेंस का इंटीग्रेशन, सोमवार से लागू होगा नया डिजिटल सिस्टम

Delhi: दिल्ली के व्यापारियों और मकान मालिकों के लिए एक जरूरी खबर है। Municipal Corporation of Delhi (MCD) अब प्रॉपर्टी टैक्स और जनरल ट्रेड लाइसेंस (GTL) की प्रक्रिया को एक साथ जोड़ने जा रहा है। यह डिजिटल सिस्टम आने वाले

Delhi: दिल्ली के व्यापारियों और मकान मालिकों के लिए एक जरूरी खबर है। Municipal Corporation of Delhi (MCD) अब प्रॉपर्टी टैक्स और जनरल ट्रेड लाइसेंस (GTL) की प्रक्रिया को एक साथ जोड़ने जा रहा है। यह डिजिटल सिस्टम आने वाले सोमवार से पूरी तरह काम करना शुरू कर देगा, जिससे अब ट्रेड लाइसेंस के लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी।

MCD ने इस सिस्टम को आसान बनाने के लिए नियमों में बदलाव किया है। अब ट्रेड लाइसेंस की फीस को प्रॉपर्टी टैक्स के साथ ही जोड़ दिया गया है। पहले व्यापारियों को अलग से आवेदन करना पड़ता था, लेकिन अब यह काम UPIC (Unique Property Identification Code) के जरिए प्रॉपर्टी टैक्स पोर्टल पर ही हो जाएगा।

नए सिस्टम के मुख्य नियम और बदलाव

विवरण नया नियम/जानकारी
लाइसेंस फीस प्रॉपर्टी टैक्स का 15% तय किया गया है
आवेदन प्रक्रिया अलग आवेदन की जरूरत खत्म, टैक्स पोर्टल से भुगतान
वैधता पेमेंट रसीद ही एक साल के लिए ‘डीम्ड लाइसेंस’ मानी जाएगी
एक प्रॉपर्टी, कई लाइसेंस एक ही UPIC पर अब एक से ज्यादा ट्रेड लाइसेंस मिल सकेंगे
जरूरी शर्तें फायर सेफ्टी और प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन करना होगा
डेडलाइन प्रॉपर्टी टैक्स एडवांस पेमेंट रिबेट की आखिरी तारीख 30 जून है

MCD मेयर Raja Iqbal Singh ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे भ्रष्टाचार कम होगा और आम जनता को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। हालांकि, जमीनी स्तर पर व्यापारी अब भी उलझन में हैं। Kamla Nagar Traders’ Association के अध्यक्ष नितिन गुप्ता का कहना है कि पोर्टल पर अभी भी स्पष्टता की कमी है, जिसकी वजह से कई व्यापारियों ने जुर्माने से बचने के लिए पुराने महंगे सिस्टम में ही लाइसेंस रिन्यू करा लिए हैं।

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के देवेंद्र यादव ने भी कहा कि व्यापारियों को अभी तक वह राहत नहीं मिली है जिसकी उन्होंने मांग की थी। फिलहाल, MCD के अधिकारी सॉफ्टवेयर में आखिरी सुधार कर रहे हैं ताकि सोमवार से यह सिस्टम बिना किसी रुकावट के काम कर सके। व्यापारियों की मुख्य चिंता यह है कि अगर एक ही इमारत की अलग-अलग मंजिलों पर अलग-अलग दुकानें हैं, तो टैक्स की गणना कैसे होगी।