Delhi में MCD ने 28 लाख इमारतों की जांच की, सिर्फ 19 को बताया खतरनाक; सर्वे की सच्चाई पर उठे सवाल

Delhi: राजधानी दिल्ली में मानसून की बारिश से पहले MCD ने करीब 28 लाख इमारतों का सर्वे किया है। इस बड़े सर्वे के बाद निगम ने केवल 19 इमारतों को ‘खतरनाक’ बताया है, जिसे लेकर अब बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों

Delhi: राजधानी दिल्ली में मानसून की बारिश से पहले MCD ने करीब 28 लाख इमारतों का सर्वे किया है। इस बड़े सर्वे के बाद निगम ने केवल 19 इमारतों को ‘खतरनाक’ बताया है, जिसे लेकर अब बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों और एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतने बड़े शहर में इतनी कम खतरनाक इमारतें होना मुमकिन नहीं है।

MCD अधिकारियों के मुताबिक, उन्होंने कुल 32.5 लाख संपत्तियों में से करीब 85.5% का निरीक्षण पूरा कर लिया है। इस दौरान 28 लाख ढांचों की जांच हुई, जिनमें से सिर्फ 19 को खतरनाक माना गया। इसके अलावा 74 ऐसी इमारतें मिलीं जिन्हें मरम्मत की जरूरत है, लेकिन नोटिस जारी होने के बावजूद अभी तक कोई काम नहीं हुआ है।

इस सर्वे के तरीके पर एक्सपर्ट्स ने आपत्ति जताई है। MCD अधिकारियों ने खुद माना है कि यह जांच सिर्फ बाहर से देखकर की गई है, क्योंकि प्राइवेट प्रॉपर्टी के अंदर जाकर स्ट्रक्चरल ऑडिट करने की इजाजत नहीं मिलती। एक अधिकारी ने बताया कि इस तरीके से सिर्फ बड़ी दरारें या झुकी हुई दीवारें ही दिखती हैं, जबकि इमारत के अंदर की कमजोरी का पता नहीं चलता।

Walled City Residential Welfare Federation के धीरज दुबे ने पुरानी दिल्ली की इमारतों की हालत पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पुरानी दिल्ली में कई इमारतें दशकों पुरानी हैं और उनकी नींव कमजोर है, वहां गहराई से जांच की जरूरत है। वहीं, बीजेपी प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने भी सर्वे की गंभीरता पर सवाल उठाए हैं।

नियमों के मुताबिक, अगर कोई इमारत खतरनाक पाई जाती है, तो MCD एक्ट की धारा 348 और 349 के तहत मालिक को नोटिस दिया जाता है। मालिक को एक हफ्ते के अंदर मरम्मत या उसे गिराने का समय मिलता है। अगर मालिक बात नहीं मानता, तो निगम खुद कार्रवाई करता है, लेकिन अक्सर कोर्ट से स्टे मिलने के कारण काम रुक जाता है। फिलहाल करोल बाग की एक इमारत को मालिक ने गिरा दिया है और साउथ जोन में एक को सील किया गया है।