Delhi में कचरा फैलाने वालों पर MCD की सख्ती, 50 हजार बल्क वेस्ट जनरेटर रडार पर, लगेगा भारी जुर्माना
Delhi: राजधानी दिल्ली को कचरे के पहाड़ों से मुक्ति दिलाने के लिए MCD ने अब कमर कस ली है। अब शहर में ज्यादा कचरा पैदा करने वाले संस्थानों और सोसायटियों की खैर नहीं होगी। MCD ने करीब 50 हजार बल्क वेस्ट जनरेटर (BWGs) की पहच
Delhi: राजधानी दिल्ली को कचरे के पहाड़ों से मुक्ति दिलाने के लिए MCD ने अब कमर कस ली है। अब शहर में ज्यादा कचरा पैदा करने वाले संस्थानों और सोसायटियों की खैर नहीं होगी। MCD ने करीब 50 हजार बल्क वेस्ट जनरेटर (BWGs) की पहचान की है, जिन्हें अब अपने कचरे का निपटारा खुद वैज्ञानिक तरीके से करना होगा।
1 अप्रैल 2026 से लागू हुए Solid Waste Management (SWM) Rules, 2026 के तहत अब इन बड़े कचरा उत्पादकों के लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य कर दिया गया है। MCD के मुताबिक, अब इन संस्थानों से कचरा उठाने के लिए MCD के ट्रक नहीं आएंगे। इन्हें अपने परिसर के भीतर ही गीले कचरे की कंपोस्टिंग या बायो-मेथनेशन जैसे तरीके अपनाने होंगे। शाहदरा नॉर्थ जोन की डिप्टी कमिश्नर ममता यादव ने साफ किया है कि चिन्हित BWGs को नियमों का पालन करना ही होगा।
दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। 30 जून 2026 को कोर्ट ने नालों में कचरा फेंकने पर चेतावनी दी और MCD को गंदगी फैलाने वालों पर जुर्माना बढ़ाकर 5,000 रुपये तक करने को कहा है। इसके साथ ही स्थानीय पुलिस को भी निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, संस्थानों पर 50,000 रुपये, मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन पर 20,000 रुपये और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
| कौन कहलाएगा Bulk Waste Generator (BWG) |
|---|
| जो रोजाना 100 किलो से ज्यादा कचरा पैदा करते हों |
| जिनकी बिल्डिंग 20,000 वर्ग मीटर या उससे ज्यादा हो |
| जो रोजाना 40,000 लीटर या उससे ज्यादा पानी इस्तेमाल करते हों |
| सरकारी विभाग, PSU, प्राइवेट संस्थान, गेटेड सोसायटियां, स्कूल, कॉलेज, मॉल, होटल और अस्पताल |
MCD के पर्यावरण प्रबंधन सेवा विभाग (DEMS) के चेयरमैन संदीप कपूर ने बताया कि शहर में कचरा निस्तारण की क्षमता बढ़ाने के लिए दो बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। IIT Delhi इस पूरे सिस्टम को लागू करने में तकनीकी मदद दे रही है। MCD का लक्ष्य 2026 से 2028 के बीच कचरा प्रोसेसिंग क्षमता को 7,841 टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 21,000 टन प्रतिदिन से ज्यादा करना है। इसके लिए नए कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट और वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट्स लगाए जाएंगे। निजी एजेंसियों के पैनल को फाइनल करने की प्रक्रिया 17 जुलाई 2026 तक पूरी कर ली जाएगी।