Delhi में MCD ने 27 लाख इमारतों का किया सर्वे, सिर्फ 19 मिलीं खतरनाक; BJP ने इसे बताया लापरवाही
Delhi: दिल्ली नगर निगम (MCD) ने मानसून से पहले शहर की इमारतों की हालत जानने के लिए एक बड़ा सर्वे किया है। इस सर्वे में 27 लाख से ज्यादा इमारतों की जांच की गई, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से केवल 19 इमारतों को ह
Delhi: दिल्ली नगर निगम (MCD) ने मानसून से पहले शहर की इमारतों की हालत जानने के लिए एक बड़ा सर्वे किया है। इस सर्वे में 27 लाख से ज्यादा इमारतों की जांच की गई, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से केवल 19 इमारतों को ही खतरनाक घोषित किया गया है। बीजेपी ने इस रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए इसे अधिकारियों की बड़ी लापरवाही बताया है।
MCD के भवन और रखरखाव विभाग के करीब 3000 कर्मचारियों ने जनवरी से 25 जून 2026 तक यह काम किया। इस साल कुल 32,55,909 संपत्तियों के सर्वे का लक्ष्य था, जिसमें से करीब 85% काम पूरा हो चुका है। हालांकि, सर्वे पूरा करने की आखिरी तारीख 15 जून थी, लेकिन विभाग समय सीमा से पीछे रह गया।
सर्वे के मुताबिक, सबसे ज्यादा खतरनाक इमारतें करोल बाग जोन में मिली हैं। अलग-अलग इलाकों में खतरनाक इमारतों की स्थिति इस प्रकार रही है:
| इलाका/जोन | खतरनाक इमारतों की संख्या |
|---|---|
| करोल बाग जोन | 7 |
| सिटी-सदर पहाड़गंज | 4 |
| पश्चिमी जोन | 4 |
| नजफगढ़ | 2 |
| नरेला और दक्षिणी जोन | 1-1 |
| शाहदरा नॉर्थ जोन | 0 |
बीजेपी प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने इस सर्वे को हास्यास्पद बताया है। उन्होंने कहा कि पुराने दिल्ली के सिटी सदर जोन में सिर्फ 4 खतरनाक संपत्तियां मिलना नामुमकिन है और वे अकेले खारी बावली और चर्च मिशन रोड पर 5 खतरनाक इमारतें दिखा सकते हैं। कपूर ने मेयर और निगमायुक्त को पत्र लिखकर अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, यूनाइटेड रेजिडेंट्स जॉइंट एक्शन (URJA) के अध्यक्ष अतुल गोयल ने भी इस सिस्टम की कमियों की बात कही है। उन्होंने मांग की है कि निगम अपनी वेबसाइट पर ऐसी इमारतों की साप्ताहिक लिस्ट सार्वजनिक करे। गौरतलब है कि मई और जून 2026 में दिल्ली के सैदुलाजाब और मालका गंज में घर गिरने की घटनाएं हुई थीं, जिनमें कई लोगों की जान गई थी, जिसके बाद इस सर्वे की सटीकता पर सवाल उठ रहे हैं।
MCD ने दक्षिणी जोन की एक खतरनाक इमारत को सील कर दिया है और कुछ ढांचों को गिराया है। मरम्मत योग्य 74 इमारतों के मालिकों को नोटिस भेजे गए हैं, लेकिन अभी तक किसी ने मरम्मत का काम शुरू नहीं किया है। निगम का कहना है कि वे निजी संपत्तियों के केवल बाहरी हिस्से की जांच करते हैं क्योंकि अंदर जाने की अनुमति नहीं मिलती।