Delhi: अब दिल्ली में किताबों को पढ़ने का तरीका बदल रहा है। लोग अब सिर्फ घर बैठकर किताबें नहीं पढ़ रहे, बल्कि उन जगहों पर जा रहे हैं जिनका जिक्र उनकी पसंदीदा किताबों में है। इस नए ट्रेंड को Literary Crawls कहा जा रहा है,
Delhi: अब दिल्ली में किताबों को पढ़ने का तरीका बदल रहा है। लोग अब सिर्फ घर बैठकर किताबें नहीं पढ़ रहे, बल्कि उन जगहों पर जा रहे हैं जिनका जिक्र उनकी पसंदीदा किताबों में है। इस नए ट्रेंड को Literary Crawls कहा जा रहा है, जिसमें पाठक उन गलियों और इमारतों को देखते हैं जो कहानियों के माहौल से मिलती-जुलती हैं।
Literary Crawls क्या है और यह कैसे काम करता है?
यह एक ऐसा अनुभव है जहां पाठक अपनी पसंदीदा किताबों की सेटिंग जैसी दिखने वाली जगहों पर जाते हैं। जैसे हॉरर कहानियों के शौकीन डरावने स्मारकों पर जाते हैं और इतिहास प्रेमियों के लिए पुरानी दिल्ली की गलियां चुनी जाती हैं। इसका मकसद पाठकों को किताबों के किरदारों और माहौल से गहराई से जोड़ना है ताकि वे कहानी को सिर्फ पढ़ें नहीं, बल्कि महसूस कर सकें।
Delhi Reads और Tangerine Book Circle की पहल
दिल्ली में इस ट्रेंड को बढ़ावा देने के लिए कई ग्रुप काम कर रहे हैं। इनमें मुख्य पहल इस प्रकार हैं:
- Delhi Reads: मोलिना सिंह द्वारा सह-स्थापित इस ग्रुप ने ‘Dilli Dallying’ नाम का इवेंट किया। इसमें करीब 80 लोग पुरानी दिल्ली की मशहूर जगहों जैसे Ghalib ki Haveli, जामा मस्जिद, उर्दू बाजार और नई सड़क घूमे।
- Tangerine Book and Poetry Circle: 23 साल के वेस्मीर द्वारा शुरू किया गया यह ग्रुप हर महीने अलग-अलग लोकेशन और फॉर्मेट में साहित्य से जुड़ी गतिविधियां करता है।
किताबों के प्रति बदलता नजरिया
Crossword Bookstores की डायरेक्टर निधि गुप्ता का कहना है कि लोग अब कहानियों को अलग तरीके से अनुभव करना चाहते हैं और यह ट्रेंड उसी की एक कड़ी है। वहीं मोलिना सिंह के मुताबिक, बुक क्लब अक्सर चार दीवारों के बीच सिमट कर रह जाते हैं। उनका मानना है कि शहर की गलियों में निकलकर साहित्य को समझने से लोगों का नजरिया बदलता है और वे पश्चिमी प्रभाव से हटकर अपने शहर के असली साहित्यिक आंदोलनों को जान पाते हैं।