Delhi में यमुना सफाई पर LG संधू सख्त, समय पर नतीजे नहीं मिले तो बदल जाएगा सरकारी कामकाज का ढांचा
Delhi: राजधानी दिल्ली में यमुना नदी की सफाई और बढ़ते प्रदूषण को लेकर उपराज्यपाल (LG) तरनजीत सिंह संधू ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अगर तय समय सीमा के अंदर यमुना की हालत में सुधार नहीं हुआ,
Delhi: राजधानी दिल्ली में यमुना नदी की सफाई और बढ़ते प्रदूषण को लेकर उपराज्यपाल (LG) तरनजीत सिंह संधू ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अगर तय समय सीमा के अंदर यमुना की हालत में सुधार नहीं हुआ, तो दिल्ली में सरकारी कामकाज के मौजूदा ढांचे को बदला जा सकता है। LG का मानना है कि जब तक विभागों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक जमीनी स्तर पर बदलाव नहीं आएगा।
LG संधू ने 27 जून 2026 को कहा कि यमुना को साफ करना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने दुनिया के उन शहरों का उदाहरण दिया जहां नदियों को प्रदूषण मुक्त किया गया है। LG के मुताबिक, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की क्षमता बढ़ाना और उनकी कार्यप्रणाली में सुधार करना सबसे जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिया कि दिल्ली सरकार के विभाग, DDA और MCD जैसी एजेंसियां आपस में तालमेल बनाकर काम करें ताकि टकराव खत्म हो और काम तेजी से पूरा हो।
यमुना की सफाई के लिए दिल्ली सरकार ने एक 45-सूत्रीय कार्य योजना बनाई है, जिसे मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंजूरी दी है। इस काम के लिए 2026-27 के ग्रीन बजट में 22,236 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। लक्ष्य यह है कि दिसंबर 2027 तक यमुना को पूरी तरह साफ कर दिया जाए और सभी STP चालू हो जाएं।
इस पूरे अभियान में केंद्र सरकार भी शामिल है। गृह मंत्री अमित शाह ने 9 जून 2026 को समीक्षा बैठक की थी, जिसमें दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों को एक टीम की तरह काम करने को कहा गया। शाह ने निर्देश दिया कि हर 20 दिन में प्रगति की जांच की जाएगी। अब तक 129 STP बन चुके हैं और 2027 के अंत तक 59 नए प्लांट और लगाए जाएंगे।
इसके अलावा, LG संधू ने हौजरानी अग्निकांड जैसी घटनाओं पर भी एक्शन लिया है। उन्होंने अधिकारियों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जिसकी कमान स्थानीय जिलाधिकारी के पास है। इस कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।